भारत की राजधानी की जब बात की जाती है तो सभी के जुबान पर बस एक ही नाम आता है- दिल्ली. लेकिन क्या आप जानते हैं दिल्ली एक कैपिटल सिटी जरूर है लेकिन भारत की राजधानी सही मायनों में नई दिल्ली है. वहीं कई लोग दिल्ली, नई दिल्ली और दिल्ली-एनसीआर को लेकर काफी कंफ्यूज रहते हैं. सभी समझते हैं कि दिल्ली-एनसीआर और दिल्ली एक ही है या कई लोगों को तो दिल्ली और नई दिल्ली में डिफरेंस ही नहीं पता है. चलिए हम आपको इन तीनों के बीच फर्क समझाते हैं.
दिल्ली का ऑफिशियल नाम ‘नेशनल कैपिटल टैरिटरी ऑफ दिल्ली’ है. जब देश आजाद हुआ तो दिल्ली में पहली बार साल 1952 में चुनाव कराए गए. जिसमें कांग्रेस विजय रही और स्वतंत्रता सैनानी चौधरी ब्रह्म प्रकाश को दिल्ली का सीएम बनाया गया. वह 17 मार्च 1952 से लेकर 12 फरवरी 1955 तक दिल्ली के सीएम के पद पर रहे. उनके बाद गुरुमुख निहाल सिंह, 12 फरवरी 1955 से एक नवंबर 1956 तक दिल्ली के सीएम के पद पर रहे. फिर स्टेट्स रिऑर्गेनाइजेशन एक्ट 1956 के प्रभाव में आने के बाद 1 नवंबर 1956 को दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला और यह डायरेक्ट केंद्र सरकार के नियंत्रण में रही. इसके बाद साल 1991 में 69वें संविधान संशोधन से दिल्ली को 70 सदस्यों वाली विधानसभा बनाने की मंजूरी दी गई. साल 1993 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की और मदनलाल खुराना दिल्ली के सीएम बने. 5 सालों में बीजेपी को 3 मुख्यमंत्री बदलने पड़े. इसके बाद 15 सालों तक दिल्ली की सत्ता पर शीला दीक्षित रही. फिर अरविंद केजरीवाल और अब आतिशी दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री है.
बता दें दिल्ली में अभी 11 राजस्व जिले हैं. जिनमें एक जिला नई दिल्ली भी है. जो भारत की राजधानी बनाता है. यहीं केंद्रीय सचिवालय, राष्ट्रपति भवन, पीएम हाऊस से लेकर विभिन्न मंत्रालय और सांसदों के आवास स्थित हैं.
अब बात दिल्ली-एनसीआर की करते हैं. एनसीआर वह क्षेत्र है जिसका कल्चर और एकोनॉमी दिल्ली से मैच करती है. बढ़ती आबादी को देखते हुए साल 1985 में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड का गठन किया गया. दिल्ली-एनसीआर में दिल्ली के अलावा विशेषकर 3 राज्य शामिल हैं. इसमें यूपी के 8 जिले, हरियाणा के 14 जिले और राजस्थान के 2 जिले शामिल है. अब सरकार एनसीआर में रोड-रेल कनेक्टिविटी बूस्ट करने पर जोर दे रही है.
NCR में शामिल राज्य और जिले
दिल्ली के सभी 11 जिले- उत्तरी दिल्ली, मध्य दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, नई दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, उत्तर पूर्वी दिल्ली, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली, दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली, शाहदरा.
यूपी के 8 जिले- गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत, शामली और मुजफ्फरनगर.
हरियाणा के 14 जिले- फरीदाबाद, गुरूग्राम, नूंह, पलवल, झज्जर, सोनीपत, पानीपत, करनाल, जिंद, रोहतक, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, भिवानी और रेवाड़ी.
राजस्थान के 2 जिले- अलवर और भरतपुर.
दिल्ली की विचित्र स्थिति
दिल्ली को संविधान में स्पेशल स्टेट्स के साथ केंद्र शासित प्रदेश का दर्ज प्राप्त है. दिल्ली न तो पूरी तरह से राज्य है और न ही पूरे तरीके से केंद्र शासित प्रदेश. दिल्ली में मल्टी एजेंसियां काम करती है. जैसे दिल्ली में लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की है जो डायरेक्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है और भूमि से जुड़े सारे काम दिल्ली डेवल्पमेंट अथोर्रिटी के पास है जो केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को रिपोर्ट करता है.
वहीं दिल्ली के रोड, स्कूल और बिजली, पानी का जिम्मा दिल्ली की सरकार के अंतर्गत आता.है. छोटी रोड, नालियों और साफ-सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है. इस तरह से दिल्ली में मल्टी एजेंसियां होने और उनमें तालमेल ना होने की वजह से काम के लिए सफर करना पड़ता है. आपने खूब सुना होगा दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच शक्तियों के बंटवारे को लेकर खींचतान चलती रहती है और मामला कोर्ट तक चला जाता है.
नगर निकाय की स्थिति
दिल्ली में मुख्यत: तीन तरह के नगर निकाय काम करते हैं. पहला दिल्ली नगर निगम, दूसरा नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् और तीसरा दिल्ली छावनी बोर्ड. नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् यानि एनडीएमसी जिसे लुटियंस दिल्ली भी जाता है. वह इलाका है जहां केंद्र सरकार की 80 प्रतिशत इमारतें मौजूद है. राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, नार्थ-साउथ ब्लॉक, पीएम आवास आदि. एनडीएमसी पूरे तरह से केंद्र सरकार के नियंत्रण में है. हालांकि दिल्ली का सीएम इसका एक्स-ऑफिसो मेंबर जरूर होता है.
दिल्ली नगर निगम की बात करें तो यह देश के बड़े नगर निगमों से एक है. इसमें 250 वार्ड आते हैं. यही 80 प्रतिशत दिल्ली के कचरे का निस्तारण करने वाली एजेंसी है. अभी दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की सरकार है और महेश खींची वर्तमान में मेयर है. अब बात करें हैं दिल्ली छावनी बोर्ड की. यह भी नगर निकाय है. जिसका प्रशासन केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है लेकिन रक्षा मंत्रालय ने देश के सभी छावनी बोर्डों को स्थानीय निकायों को सौंपने का निर्णय लिया है. इसी वजह से यहा करीब 2 साल से चुनाव नहीं हुए हैं.
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