वक्फ संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश कर दिया गया है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल सदन के पटल पर पेश किया. जिसके बाद इस बिल पर सदन में बहस हो रही है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय तय किया है. इस दौरान NDA के सांसद 4 घंटे 40 मिनट दिए गए हैं, इसके अलावा 3 घंटे 20 मिनट का समय विपक्ष को दिया गया है. इसके बाद बिल पर वोटिंग होगी.
#WATCH | Parliamentary Affairs Minister Kiren Rijiju introduces Waqf Amendment Bill in Lok Sabha. pic.twitter.com/BukG8RSqBT
— ANI (@ANI) April 2, 2025
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल पेश करने के बाद इस बिल पर चर्चा की शुरुआत की. किरेन रिजिजू ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस बिल का विरोध करने वालों के दिलों में बदलाव आएगा. वहीं उन्होंने जेपीसी के सभी सदस्यों को धन्यवाद देते दिया और कहा कि इस बिल पर लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त समिति (जेपीसी) में विस्तृत चर्चा की. इससे पहले इतनी लंबी चर्चा भारत के संसदीय इतिहास में कभी नहीं हुई. रिजिजू ने दो टूक कहा कि अगर मोदी सरकार वक्फ संशोधन बिल पेश नहीं करती तो पार्लियामेंट हाऊस भी वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया जाता.
केंद्रीय मंत्री ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि स्वतंत्र भारत का पहला वक्फ अधिनियम साल 1954 में बना था. उसी में प्रदेश के वक्फ बोर्डों के लिए प्रावधान किए थे. 1995 में संशोधन किया गया. उस वक्त तो किसी ने इस अधिनियम को असंवैधानिक और गैरकानूनी नहीं बताया था. आज जब इसी विधेयक में संशोधन करने कर रहे हैं तो विपक्ष को यह असंवौधानिक और गैरकानूनी लग रहा है. किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया.
कांग्रेस पर जमकर बरसे रिजिजू
संसदीय कार्य मंत्री ने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि “2013 में कुछ ऐसे कदम उठाए गए थे जो आपके मन मे सवाल खड़े करेंगे. 2013 में सिखों, हिंदुओं, पारसियों और अन्य लोग वक्फ बना सकते थे. यह बदलाव कांग्रेस ने 2013 में किया था. कांग्रेस ने बोर्ड को खास बनाया, शिया बोर्ड में सिर्फ़ शिया ही शामिल होंगे. एक धारा- 108 जोड़ी गई कि वक्फ का प्रभाव हर दूसरे कानून पर हावी होगा. यह धारा कैसे स्वीकार्य हो सकती है? ”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली वक्फ बोर्ड ने सीजीओ कॉम्प्लेक्स, संसद भवन सहित कई संपत्तियों पर दावा ठोक दिया. वहीं यूपीए सरकार ने इस सारी जमीन को डिनोटिफाई कर वक्फ बोर्ड को दे दिया था. 5 मार्च 2014 को यूपीए सरकार ने आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली 123 प्रमुख संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दिया था.
किरेन रिजिजू ने कहा, “वक्फ बोर्ड के प्रावधानों का किसी मस्जिद, मंदिर या धार्मिक स्थल के प्रबंधन से कोई लेना-देना नहीं है. यह केवल संपत्ति प्रबंधन का मामला है. अगर कोई इस बुनियादी अंतर को समझने में विफल रहता है या जानबूझकर नहीं समझना चाहता है, तो मेरे पास इसका कोई समाधान नहीं है.”
बता दें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को बुधवार को संसद में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है.
ये भी पढ़ें- वक्फ बिल के समर्थन में भोपाल के मुस्लिम, मस्जिद के बाहर मनाया जश्न, जताया PM मोदी का आभार
कमेंट