वक्फ बोर्ड वर्तमान में भारत भर में 9.4 लाख एकड़ जमीन पर फैला है. यह 8.7 लाख संपत्तियों को नियंत्रित करता है, जिसका अनुमानित मूल्य 1.2 लाख करोड़ रुपये है. भारत में दुनिया की सबसे बड़ी वक्फ होल्डिंग है, इसके अलावा, सशस्त्र बलों और भारतीय रेलवे के बाद वक्फ बोर्ड भारत में सबसे बड़ा भूभाग का मालिक है.
वक्फ बोर्ड की मनमानियों से सिर्फ गैरमुसलमान ही नहीं परेशान है बल्कि मुसलमान भी इसकी तानाशाही का शिकार हुए हैं. केंद्र सरकार को मुसलमानों और गैर-मुसलमानों से वक्फ भूमि पर जानबूझकर अतिक्रमण और वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन जैसे मुद्दों पर बड़ी संख्या में शिकायतें मंत्रालय को प्राप्त हुईं. जब मंत्रालय ने प्राप्त शिकायतों की प्रकृति और मात्रा का विश्लेषण किया है तो पाया कि अप्रैल, 2023 से प्राप्त 148 शिकायतों में ज्यादातर अतिक्रमण, वक्फ भूमि की अवैध बिक्री, सर्वेक्षण और पंजीकरण में देरी और वक्फ बोर्डों और मुतवल्लियों के खिलाफ शिकायतों से जुड़ी हुई हैं.
मंत्रालय ने अप्रैल, 2022 से मार्च, 2023 तक सीपीजीआरएएमएस (केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली) पर प्राप्त शिकायतों का भी विश्लेषण किया और पाया है कि 566 शिकायतों में से 194 शिकायतें वक्फ भूमि पर अतिक्रमण और अवैध रूप से हस्तांतरण से जुड़ी थीं. जिसमें 93 शिकायतें वक्फ बोर्ड/मुतवल्लियों के अधिकारियों के खिलाफ थीं.
इसके अलावा, सांसदों ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में देरी, वक्फ बोर्ड द्वारा बाजार मूल्य से कम किराया लेने, वक्फ भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण, विधवाओं के उत्तराधिकार अधिकार, सर्वेक्षण आयुक्त द्वारा सर्वेक्षण पूरा न करने, वक्फ संपत्ति रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की धीमी प्रगति आदि के मुद्दे उठाए.
केंद्रीय न्याय मंत्रालय ने न्यायाधिकरणों के कामकाज का विश्लेषण किया और पाया है कि न्यायाधिकरणों में 40,951 मामले लंबित पड़े हैं, जिनमें से 9942 मामले मुस्लिम समुदाय द्वारा वक्फ का प्रबंधन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ दायर हैं. इसके अलावा, मामलों के निपटान में अत्यधिक देरी होती है और न्यायाधिकरण के निर्णयों पर न्यायिक निगरानी का कोई प्रावधान भी नहीं है.
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