वक्फ संशोधन बिल 2025 जल्द ही कानून का रूप ले सकता है. इस बिल को लेकर तरह-तरह के भ्रम भी फैलाए जा रहे हैं . इस पर लोग दो खेमों में बंट चुके हैं. एक वो जो बिल के समर्थन में हैं और एक वो जो बिल का विरोध कर रहे हैं बिना किसी आधार के. तो आइए जान लेते हैं उन सभी सवालों के जवाब जो बिल की गलत रूपरेखा पेश कर लोगों में लगातार भ्रम फैला रहे हैं.
1- क्या वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की संख्या ज्यादा होगी?
यह सही है, यह सिर्फ भ्रम फैलाने वाला सवाल है. विधेयक में यह जरूरी किया गया है कि केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्डों में कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होंगे. बोर्ड के ज्यादातर सदस्य मुस्लिम समुदाय से ही रहेंगे. इसकी पीछे की वजह है कि मुसलमानों के प्रतिनिधित्व को कम किए बिना बोर्ड में विशेषज्ञों को बढ़ावा देना और पारदर्शिता लाना है.
2- क्या वक्फ संपत्तियां समाप्त कर दी जाएंगी?
ऐसा बिल्कुल नहीं है, वैध वक्फ संपत्तियां संरक्षित रहेंगी. एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ घोषित कर दी जाती है, तो वह परमानेंट उसी रूप में बनी रहती है. यह बिल केवल बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता के लिए नियमों को बताता है. यह बिल जिला कलेक्टर को उन संपत्तियों की समीक्षा करने की अनुमति देता है, जिन्हें गलत तरीके से वक्फ संपत्ति घोषित किया गया है, खासकर यदि वे वास्तव में सरकारी संपत्ति हों तो.
3- क्या वक्फ संपत्तियां सर्वे के दायरे से बाहर कर दी जाएंगी?
ऐसा बिल्कुल नहीं है. वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण होगा. यह बिल सर्वे कमिश्नर के रोल को खत्म कर देता है और जिला कलेक्टर को ये जिम्मेदारी दी गई है. जिला कलेक्टर मौजूदा राजस्व प्रक्रियाओं का उपयोग करके सर्वेक्षण कराएगा. इस बदलाव का उद्देश्य सर्वेक्षण प्रक्रिया को रोके बिना वतर्मान रिकॉर्ड में सुधार करना है.
4- क्या मुसलमानों की निजी भूमि अधिग्रहित की जाएगी?
नहीं, कोई निजी भूमि अधिग्रहित नहीं की जाएगी. यह विधेयक केवल उन संपत्तियों पर लागू होगा, जिन्हें वक्फ घोषित किया गया हो.
यह निजी या व्यक्तिगत संपत्ति को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करता है. जिसे वक्फ के रूप में दान नहीं किया गया हो.
सिर्फ अपनी मर्जी और कानूनी रूप से वक्फ घोषित की गई संपत्तियां ही नए नियमों के तहत आएंगी.
5- क्या सरकार वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करेगी?
यह भ्रम फैलाने वाली बात है. यह बिल जिला कलेक्टर को यह समीक्षा करने और सत्यापित करने का अधिकार देता है कि किसी संपत्ति को गलत तरीके से वक्फ प्रॉपर्टी के रूप में वर्गीकृत तो नहीं किया गया है. खासकर सरकारी संपत्ति को लेकर. यह बिल वैध रूप से घोषित वक्फ संपत्तियों को जब्त करने के लिए ऑथराइज्ड नहीं है.
6- क्या ऐतिहासिक वक्फ स्थलों की पारंपरिक स्थिति में बदलाव होगा?
बिल्कुल ऐसा नहीं होगा. यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के धार्मिक या ऐतिहासिक स्वरूप में हस्तक्षेप नहीं कर सकता. इसका उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना और धोखाधड़ी वाले दावों पर लगाम लगाना है, नाकि इन स्थलों की प्रकृति में बदलाव करना.
7- क्या ये विधेयक मुस्लिमों के धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप करेगा?
विधेयक का बेसिक लक्ष्य रिकॉर्ड को सुरक्षित और संरक्षित रखने की प्रक्रिया में सुधार करना है. कुप्रबंधन को कम करना और जवाबदेही तय करना है. यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के अपने धार्मिक संपत्ति को मैनेज करने के अधिकार को नहीं छीनता है, बल्कि यह इन संपत्तियों को पारदर्शी और कुशलतापूर्वक मैनेज करने के लिए एक रूपरेखा प्रस्तुत करता है.
वक्फ बिल का ये संशोधन प्रदेशों के वक्फ बोर्डों में शिया, सुन्नी, बोहरा, अघाखानी और पिछड़े मुस्लिम समुदायों का व्यापक प्रतिनिधित्व देता है. यह अनिवार्य करता है कि शिया, सुन्नी और पिछड़े मुस्लिम समुदायों में से प्रत्येक से कम से कम एक सदस्य बोर्ड में होना जरूरी है. इसका लक्ष्य मुस्लिम आबादी के विविध वर्गों को बोर्ड में जगह देना है. जिससे वक्फ संपत्ति प्रबंधन में सभी का प्रतिनिधित्व तय हो सके.
कमेंट