वक्फ संशोधन बिल लोकसभा से पारित हो चुका है. राज्यसभा में पास होते ही कानून का रूप ले लेगा. अब वक्फ बिल से जुड़े नियमों में कई तरह बदलाव हुए हैं. जिसके तहत मुसलमान अपनी संपत्ति का वक्फ तो कर सकते हैं लेकिन कड़े नियमों और शर्तों के साथ. तो आईए जानते हैं उन नियमों को जो अब बक्फ बोर्ड ही नहीं बल्कि अपनी संपत्ति वक्फ करने वालों पर भी लगाम कसेंगे.
1. वक्फ करने से पहले महिलाओं को उनका हिस्सा जरूरी
वक्फ संशोधन विधेयक में एक नया प्रावधान है जो कहता है कि अगर कोई मुसलमान अपनी किसी संपत्ति को वक्फ को दान में देना चाहता है तो उसे इसकी घोषणा करने से पहले घर की महिलाओं को उनका हिस्सा देना ही होगा. इसमें बेटियों, बहनों, पत्नियों, विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथ शामिल हैं.
2- वक्फ बाय यूजर (Waqf By User) प्रावधान समाप्त
वक्फ संशोधन बिल में ‘वक्फ बाय यूजर’ के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है. अब सिर्फ वही संपत्ति वक्फ की संपत्ति मानी जाएगी, जिसे लिखित दस्तावेज के माध्यम से वक्फ के लिए समर्पित किया गया हो. लेकिन पहले ऐसा बिल्कुल नहीं था. ‘वक्फ बाय यूजर’ एक पारंपरिक तरीका था, जिसके तहत कोई संपत्ति, जैसे मस्जिद, कब्रिस्तान या दरगाह, अगर लंबे समय से मुस्लिम समुदाय द्वारा धार्मिक या सामुदायिक कामों के लिए इस्तेमाल हो रही थी, तो उसे बिना किसी आधिकारिक दस्तावेज के भी वक्फ मान लिया जाता था.
3. अब शर्त पूरी किए बिना मुस्लिम नहीं कर सकते संपत्ति का वक्फ
अब मुस्लिमों को संपत्ति दान के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करना होगा. नए प्रावधान के तहत कोई भी मुसलमान, कम से कम 5 वर्ष से इस्लाम धर्म में हो और संपत्ति का कानूनी मालिक हो. यानी कि कोई व्यक्ति अगर 5 साल से कम समय से इस्लाम को मान रहा है, तो व्यक्ति धर्मांतरण करके मुस्लिम बनता है तो ऐसी परिस्थिति में वह अपनी संपत्ति वक्फ को कतई दान नहीं कर पाएगा.
4. जनजातीय समाज की जमीन को नहीं कर पाएंगे वक्फ
इस विधेयक में जनजातीय समाज की जमीन को वक्फ घोषित करने से पूरी सुरक्षा दी गई है. भारत में जनजातीय समुदायों की जमीन को संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत चिह्नित और संरक्षित किया गया है. ये जमीनें उनकी संस्कृति, आजीविका और पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं.
5. धारा 40 का खात्मा
विधेयक में पुराने कानून की धारा 40 को हटाने का प्रस्ताव एक बड़ा बदलाव है. अधिनियम की धारा 40 में प्रावधान था कि कोई संपत्ति वक्फ है या नहीं, यह निर्णय लेने का अंतिम अधिकार वक्फ बोर्ड के पास ही था.
6. एएसआई की जमीनों और संपत्तियों को सुरक्षा
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित स्मारकों को अब वक्फ के दायरे से बाहर कर दिया गया है.
7. जिला कलेक्टर को व्यापक अधिकार
विधेयक में जिला कलेक्टर को वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट और विवादों के निपटारे में व्यापक अधिकार अधिकार दिए गए हैं. पुराने वक्फ अधिनियम, 1995 में जिला कलेक्टर का कोई बड़ा रोल नहीं था. वक्फ बोर्ड खुद संपत्ति की जांच करता था, दावा करता था, और अपने फैसले थोप देता था. लेकिन अब इसे बदल दिया गया है. अब कलेक्टर ही सरकारी संपत्ति की पहचान करेगा, किसी संपत्ति के वक्फ होने या न होने का फैसला करेगा, साथ ही विवादों का निपटारा भी कलेक्टर ही करेगा.
8. सेंट्रल और स्टेट वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिमों की एंट्री
विधेयक के अनुसार सेंट्रल वक्फ काउंसिल और स्टेट वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की भी नियुक्ति होगी. केंद्रीय वक्फ बोर्ड में अधिकतम 4 या कम से कम 2 सदस्य गैर मुस्लिम हो सकते हैं. यहां ये जरूरी रहेगा कि वक्फ बोर्ड या इसके परिसर में नियुक्त कोई भी गैर-मुस्लिम सदस्य धार्मिक गतिविधियों में शामिल नहीं होगा. उनका रोल सिर्फ यह सुनिश्चित करना होगी कि दान से संबंधित मामलों का प्रशासन नियमों के अनुसार संचालित हो रहा है या नहीं. इसके साथ ही सेंट्रल वक्फ काउंसिल और स्टेट वक्फ बोर्ड दोनों में कम से कम दो महिलाएं भी शामिल होंगी.
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