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10 सितंबर 1976: पिस्तौल की नोक पर बोइंग 737 का अपहरण, पायलट की सूझबूझ से बची 66 जानें

Editor Ritam HindiEditor Ritam Hindi10 Sept 2025, 11:19 am IST
10 सितंबर 1976: पिस्तौल की नोक पर बोइंग 737 का अपहरण, पायलट की सूझबूझ से बची 66 जानें

भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास में 10 सितंबर 1976 की तारीख एक तनावपूर्ण और यादगार दिन के रूप में दर्ज है। यह वह समय था जब देश आपातकाल की सख्त परिस्थितियों से गुजर रहा था और हर ओर राजनीतिक असंतोष व असुरक्षा का माहौल था। इसी बीच, दिल्ली के पालम हवाई अड्डे से इंडियन एयरलाइंस का बोइंग 737 विमान मुंबई (तब बंबई) के लिए उड़ान भरता है। इसमें 66 यात्री सवार थे। लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दो कश्मीरी युवकों ने पिस्तौल की नोक पर इस विमान का अपहरण कर लिया। उनका इरादा इसे लीबिया ले जाने का था।

जैसे ही विमान ने आसमान में उड़ान भरी, अपहरणकर्ताओं ने कॉकपिट में प्रवेश कर कैप्टन रेड्डी और उनकी टीम को बंदूक दिखाकर नियंत्रण अपने हाथ में लेने की धमकी दी। यात्रियों में अचानक दहशत फैल गई। अपहरणकर्ताओं ने साफ किया कि वे इस विमान को लीबिया ले जाना चाहते हैं।

लेकिन तकनीकी स्थिति उनके पक्ष में नहीं थी। विमान में इतना ईंधन ही नहीं था कि वह इतनी लंबी दूरी तय कर सके। इसी दौरान कैप्टन रेड्डी की सूझबूझ काम आई। उन्होंने शांति और धैर्य से अपहरणकर्ताओं को समझाना शुरू किया। उन्होंने उन्हें बताया कि ईंधन और नेविगेशन चार्ट की कमी के कारण लीबिया तक जाना असंभव है। अपहरणकर्ता भारत में उतरने को तैयार नहीं थे। काफी देर की बहस के बाद उन्होंने पायलट को पाकिस्तान जाने का आदेश दिया। मजबूर होकर विमान को लाहौर की ओर मोड़ दिया गया।

लाहौर पहुंचने के बाद विमान पाकिस्तानी अधिकारियों की निगरानी में खड़ा कर दिया गया। अपहरणकर्ताओं ने कोई औपचारिक मांग सामने नहीं रखी। लेकिन भारत ने तुरंत पाकिस्तान को सख्त संदेश भेजा कि यदि यात्रियों की जान को कोई खतरा हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पाकिस्तान पर होगी।

पाकिस्तानी चाल और बचाव अभियान तनाव लगातार बढ़ रहा था। अपहरणकर्ताओं को यकीन था कि पाकिस्तान की जमीन पर वे सुरक्षित हैं। लेकिन जल्द ही पाकिस्तानी सेना ने रणनीति बनाई। उन्हों ने अपहरणकर्ताओं को भोजन और पानी दिया। दिखने में यह मेहमाननवाजी थी, लेकिन असल में यह उनकी योजना का हिस्सा था। भोजन और पेय पदार्थों में नशे की दवा मिला दी गई थी।

धीरे-धीरे अपहरणकर्ता बेहोश हो गए। जैसे ही विमान में सन्नाटा छा गया, पाकिस्तानी कमांडो ने कार्रवाई की। उन्होंने बिना एक भी गोली चलाए विमान पर कब्जा कर लिया और अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। इस तरह 66 यात्रियों की जान बच गई।

दोनों अपहरणकर्ता कश्मीर की आजादी का मुद्दा उठाना चाहते थे। पाकिस्तान ने उन्हें गिरफ्तार तो किया, लेकिन 1977 में मात्र एक साल बाद ही रिहा कर दिया। भारत ने इस पर तीव्र विरोध दर्ज कराया, लेकिन पाकिस्तान अपने फैसले पर अड़ा रहा।