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पाकिस्तान प्रेम और अपनों पर वार? जानें कांग्रेस शासनकाल के दौरान राष्ट्र और हिंदू विरोधी गतिविधियां

Editor Ritam HindiEditor Ritam Hindi31 Mar 2026, 10:47 am IST
पाकिस्तान प्रेम और अपनों पर वार? जानें कांग्रेस शासनकाल के दौरान राष्ट्र और हिंदू विरोधी गतिविधियां
कांग्रेस शासनकाल के दौरान राष्ट्रविरोधी और हिंदू विरोधी गतिविधियां

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 26 मार्च, 2026 को कांग्रेस के पाकिस्तान के लिए प्रेम और हिंदुओं को आतंकी बताने वाले पोस्ट वायरल हुए। इस पर यूजर्स ने जेन जी (Gen Z) से आगामी विधानसभा चुनावों में वोट डालने से पहले कांग्रेस की उस काली सच्चाई को उजागर करने की अपील की। पाकिस्तानी आतंकियों के स्वागत से उन्हें रिहा करने तक ऐसे कई मामले सामने आए, जिसने कई सुलगते सवालों को जन्म दिया।

यहां सवाल उठता है कि कांग्रेस के समय में पाकिस्तान को दोस्त और अपने ही देश में रहने वाले हिंदुओं से सौतेला व्यवहार (आतंकी बताकर प्रस्तुत करना) क्यों किया? आज ईरान को लेकर कांग्रेस भारत सरकार से सवाल करते हुए दावा कर रही है कि सरकार अमेरिका से चल रही है। मगर उसी कांग्रेस ने अपने समय में अमेरिका की चापलूसी करते हुए ईरान से निर्यात पर बैन लगा दिया था।

यहां सवाल यह भी है कि ऑपरेशन सिंदूर से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस अपने कार्यकाल में पाकिस्तान को सपोर्ट क्यों करती थी? साथ ही कांग्रेस के समय कई आतंकियों को भी रिहा किया गया, जिस पर भी काफी सवाल उठाए जाते हैं।

पहलगाम हमले पर राहुल गांधी के करीबी कांग्रेसी नेताओं के देशविरोधी बयान-(सोर्स: Perform India)

हालांकि ये पहली बार नही हुआ, जब कांग्रेस (यूपीए) का पाकिस्तान के लिए दोस्ताना रवैया उजागर हुआ हो। नीचे कांग्रेस के पाकिस्तान प्रेम और हिंदू विरोधी एजेंडा चलाने वाली घटनाओं से जुड़े प्रमुख मामले बताए जा रहे हैं।

1. जब कांग्रेस ने ‘गुडविल जेस्चर’ के तहत छोड़ा था आतंकी बना पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड

बात 28 मई, 2010 की है, जब UPA सरकार द्वारा पाकिस्तान से दोस्ती बढ़ाने और गुडविल जेस्चर के तहत 25 आतंकियों को छोड़ा गया था। इन आतंकियों में जैश ए मोहम्मद (JeM) का आतंकी शाहिद लतीफ भी शामिल था, जो बाद में जाकर  जनवरी 2016 में हुए पठानकोट एयरबेस हमले का मुख्य हैंडलर बना। बता दें कि शाहिद लतीफ जैश ए मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिज्ब-उल-मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों सो जुड़ा हुआ था। भारत में वो 11 साल जेल में बंद रहा।

मोटे तौर पर आंकड़ों को देखें तो कांग्रेस निहित यूपीए सरकार के समय पर कुल 169 टेरेरिस्ट को छोड़ा जा चुका है।

2. अफजल गुरु की फांसी को लगातार आगे खिसकाया गया, राजनितिक आलोचना के बीच UPA सरकार पर उठे सवाल

भारतीय संसद हमले (2001) का मुख्य दोषी मानते हुए अफजल गुरु को सुप्रीम कोर्ट ने साल 2002 में फांसी की सजा सुनाई थी। मगर यूपीए सरकार के (2004-2014) के दौरान दया याचिका को एक-दो नहीं बल्कि 11 साल की देरी की गई। इस पर सरकार की कड़ी आलोचना की गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तिहाड़ जेल में 9 फरवरी 2013 को फांसी दी गई।

कांग्रेस सरकार ने सफाई देते हे इसे कानून के अनुसार लिया गया निर्णय बताया। वहीं फांसी के बाद तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने आतंकी के परिवारो को सूचना देने में देरी पर असंतोष व्यक्त किया।

3. पाकिस्तानी हमले के बाद कांग्रेस नेताओं ने जवाबी कार्रवाई के बजाय बातचीत से मामला सुलझाने का सुझाव दिया

साल 2012 से 2014 के बीच कांग्रेस नेताओं ने अपने बयाने में आतंकवादी हमलों पर चुप्पी साधने की सलाह दी। साथ ही पाकिस्तान पर जबावी कार्रवाई करने की जगह रिश्ते सुधारने के सुधाव दिए। कई मौकों पर भारतीय सराकरी अधिकारियों ने पाकिस्तानी नेताओं को हमारे सैंकड़ों जवानों के बलिदान को कम आंकने दिया। ऐसे कई बयान सवालों के घेरे में आते हैं।

साल 2014 में चुनाव से पहले सलमान खुर्शीद ने पाक मीडिया से कहा कि हमारे वजीर-ए-आजम पाकिस्तान आना चाहते हैं, लेकिन मुमकिन नहीं हो पा रहा। मणिशंकर अय्यर का एक बयान वायरल हुआ, जिसमें वह कह रहे हैं, “LoC पर भले ही गोली चल रही हो, लेकिन हमें हमेशा बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए, गोली का जवाब गोली से देकर नहीं।”

4. राम मंदिर बनाने की जल्दी क्या है….? जब राम मंदिर के खिलाफ केस लड़ रहे कांग्रेस नेता ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा

दिसंबर 207 में, 1कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि सुनवाई को 2019 तक स्थगित किया जाए। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि इसका चुनावों पर प्रभाव पड़ेगा। इस मामले में सुनवाई कर रही दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे ठुकराते हुए सुनवाई की अगली तारीख 8 फरवरी तय की।

5. हिंदुओं को बदनाम करने के लिए कांग्रेस ने गढ़ा था हिंदू आतंकवाद का शब्द

16 जनवरी 2013 को तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने दावा किया था कि RSS और BJP के कैंपों में “हिंदू आतंकवाद” को बढ़ावा दिया जा रहा है। मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद ब्लास्ट में हिंदू कट्टरपंथियों की भूमिका की बात कही गई थी, हालांकि भारी विरोध के बाद उन्होंने अपने बयान पर माफी भी मांगी।

बाद में अदालतों में इन मामलों में ठोस सबूत पेश नहीं हो सके। 2019 में समझौता एक्सप्रेस और 2025 में मालेगांव ब्लास्ट केस में NIA कोर्ट ने कई आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। सबसे पहले इस शब्द का प्रयोग मालेगाव ब्लास्ट के बाद किया गया था।  राहुल गांधी से लेकर पी चिदंबरम, दिग्विजय सिंह जैसे कांग्रेसी नेताओं ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस शब्द का प्रयोग किया।

6. सेना प्रमुख जरनल वीके सिंह ने लगाया कांग्रेस सरकार और PMO पर संवेधनशील जानकारी लीक करने का आरोप

नवंबर 2013 में, सेना प्रमुख जरनल वी. के. सिंह ने तत्कालीन गृह मंत्री सुशीलकुमार शिंदे पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय और सेना के अधिकारी उनके खिलाफ जानकारी लीक कर रहे थे। इसके बाद जरनल वीके सिंह और यूपीए सरकार के बीच का तनाव फिर से चर्चाओं में आ गया था।

खबरों के अनुसार, UPA सरकार ने 2010 में पाकिस्तान को भारत की सेना तैनाती, हथियारों की मात्रा और रक्षा खरीद की योजनाओं जैसी गोपनीय जानकारी साझा की।

7. जब राम का मुद्दा उठाने पर राहुल गांधी ने कहा: बीजेपी ‘राम की दलाली’ करती है

साल 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पीलीभीत प्रचार अभियान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विवादित बयान देते हुए कहा था कि वो (BJP) “राम की दलाली” कर रही है। राहुल गांधी ने कहा, “पहले बीजेपी के लोग आए, उन्होंने आपसे कहा, भाईया, राम के नाम पे वोट दो..राम के दलाली के।”  इस बयान पर राहुल गांधी को विवादों का सामना करना पड़ा।

  • 2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 28 सीटें जीतीं।
  • 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 सीटों में से कांग्रेस सिर्फ 2 सीटें जीत सकी।

8. साम्प्रदायिक हिंसा विधेयक, 2011 (Communal Violence Bill) से सामने आया हिंसा का असली चेहरा 

ये काफी विवादित विधेयक था। इस प्रस्तावित कानून को लेकर व्यापक विरोध हुआ था क्योंकि इसे बहुसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ पक्षपाती माना गया था। ‘प्रिवेंशन ऑफ कम्युनल एंड टारगेटेड वायलेंस बिल’ (PCTV) के शुरुआती मसौदे में यह धारणा थी कि दंगे केवल बहुसंख्यक समुदाय द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ किए जाते हैं। आलोचकों का कहना था कि यह कानून हिंदुओं को लक्षित करने के लिए बनाया गया था। वर्तमान में ये विधेयक प्रभावी नहीं है।

9. 2013 में लद्दाख के डेपसांग (Depsang) क्षेत्र में चीनी सेना की घुसपैठ को लेकर सरकार की आलोचना हुई 

चीनी सैनिक भारतीय सीमा के 19 किलोमीटर अंदर तक घुस आए थे। तत्कालीन विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने इसे “एक मुँहासे” (acne) की तरह बताया जिसे दवा से ठीक किया जा सकता है, जिसे विपक्ष ने राष्ट्रीय सुरक्षा का अपमान माना। बाद में खुद चीन ने स्वीकार किया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों ने डेपसांग घाटी में घुसपैठ की थी। ये घटनाएं वास्तविक नियंत्रण रेखा के बारे में अलग-अलग धारणाओं के कारण हुईं।

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