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Dhurandhar की ताबड़तोड़ कमाई के बीच लेफ्ट की प्रोपेगेंडा चाल, 17 फिल्मों से जानें हिंदू पहचान को कैसे विकृत किया

Editor Ritam HindiEditor Ritam Hindi25 Mar 2026, 10:46 am IST
Dhurandhar की ताबड़तोड़ कमाई के बीच लेफ्ट की प्रोपेगेंडा चाल, 17 फिल्मों से जानें हिंदू पहचान को कैसे विकृत किया
धुंरधर मूवी के कमाई के आंकड़ों से प्रभावित होकर वामपंथी लॉबी लगातार निशाना बना रही है।

एक्शन थ्रिलर फिल्म धुरंधर: द रिवेंज बॉक्स ऑफिस पर दहाड़ रही है और कमाई के सभी आंकड़ों को धुंआ-धुंआ कर रही है। इस बीच कट्टरपंथी और लेफ्ट लॉबी लगातार फिल्म को प्रोपेगैंडा बता कर आरोप लगा रही है कि ये एक खास समूह को निशाना बना रही है। लेफ्ट इकोसिस्टम बिना देखे फिल्म को झूठ और प्रोपेगेंडा बता रहा है। हालांकि फिल्म देखने वाले व्युअर्स और कमाई के आंकड़े कुछ और ही कहानी बता रहे हैं।

बॉलीवुड भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी सांस्कृतिक इंडस्ट्री और केंद्र रहा है, जहां सामाजिक मूल्यों और कथाओं को अभिव्यक्त किया गया। हालांकि एक लंबे अरसे से क्रिएटिव फ्रीडम का फायदा उठाते हुए एक खास तरह की कहानियों को दोहराया गया, जहां हिंदू परंपराओं को विकृत और देवी-देवताओं का अपमान करने वाली छवि दिखाई गई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये सब भी प्रोपेगेंडा थीं?

नीचे बॉलीवुड फिल्मों द्वारा हिंदू पहचान को विकृत करने और आलोचना करने से जुड़े उल्लेखनीय उदाहरणों के बारे में बताने जा रहे हैं। इससे एक खास तरह का पैटर्न उभरकर सामने आता है, जो फिल्म उद्योग में मौजूद कमियों को दर्शाता है।

1.ओ’ रोमियो (13 फरवरी, 2026)

O’ Romeo movie dialogue presenting propaganda Surge (Source – FirstPost)

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ओ रोमियो में डायरेक्टर विशाल भारद्वाज अंडरवर्ल्ड का बचाव करते हुए दिखाई देते हैं। मूवी के एक सीन में एक्टर शाहिद कपूर का एक डायलॉग है “बाबरी कांड से पहले, अंडरवर्ल्ड धर्म से परे था। कोई हिंदू नहीं था, कोई मुसलमान नहीं था। उसके बाद, हम भी विभाजित हो गए।”  ये अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

2. शेरनी (18 जून, 2021)

Sherni Movie (Source – The Hindu post)

बॉलीवुड फिल्म शेरनी बाघिन अवनी की हत्या पर आधारित थी। वास्तविक जीवन के वन अधिकारी के.एम. अभरना को विद्या विंसेंट के रूप में चित्रित किया है, वहीं शिकारी अशगर अली को रंजन राजहंस बनाकर प्रस्तुत किया गया।

आलोचकों का कहना है कि इससे वास्तविक घटनाओं और व्यक्तियों की छवि प्रभावित हुई। पूरी रूपरेखा ही बदल दी। उनका दावा है कि फिल्म में हिंदू मान्यताओं का मजाक उड़ाते हुए एकतरफा नैरेटिव गढ़ा गया, जो तथ्यों से अलग और पक्षपातपूर्ण प्रतीत होता है।

3. बजरंगी भाईजान पर उठे सवाल (17 जुलाई, 2015)

निर्देशक कबीर खान ने फिल्म को अलग तरीके से प्रस्तुत किया। बजरंगी भाईजान में सलमान खान का किरदार (पवन चतुर्वेदी) अपनी पूरी यात्रा के दौरान हनुमान जी से प्रार्थना करता है और एक दरगाह (विशेष रूप से कश्मीर में अशमुकाम दरगाह) के दर्शन के बाद सफलता प्राप्त करता है।

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4. “पीके”: भगवान शिव निंदा से भावनाएं आहत

PK Movie Controversy (Source – Youth Magazine)

डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने फिल्म पीके में एक्टर आमिर एक एलियन के रूप में पृथ्वी पर आता है। अपना लॉकेट वापस न मिलने पर हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के सामने रोता और दोषारोपण करता है।

इस बीच सीन में भगवान शिव को डरा हुआ और भागते हुए दिखाया गया है। जोकि नायक से बचकर भाग रहे होते हैं। इसे लेकर लोगों का मानना है कि फिल्म के इस चित्र को रखने उद्देश्य उत्तेजक विचार उत्पन्न करना है। हिंदू देवी-देवताओं के लिए अनादर करने की आलोचना की गई।

5. हैदर (2014) – सूर्य मंदिर को शैतान की गुफा और पाकिस्तान पर नरम तैवर

Haider Movie (Source – Netflix)

निर्देशक विशाल भारद्वार द्वारा निर्देशित इस मूवी में कला के वेश में सांस्कृतिक बर्बरता दिखाई गई है, जहां मार्तंड सूर्य मंदिर को शैतान की गुफा बताया गया है। वहीं पाकिस्तान का महिमामंडन कर आतंकियों से सहानुभूति दिखाई गई है। इसे सेक्युलरिज्म की चादर से कवर कर दिया गया।

फिल्म हैदर का गाना बिस्मिल, मार्तंड सूर्य मंदिर के खंडहरों में फिल्माया गया। इस मंदिर का निर्माण कश्मीर के शासक ललितादित्य मुक्तापीड़ा ने 8वीं सदी में करवाया था। 15वीं सदी में सिकंदर शाह मीरी ने इसे ध्वस्त कर दिया। मगर पूरा नहीं तोड़ सका।

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6. स्टूडेंट ऑफ द ईयर (2012) – राधा के गाने को ग्लेमरेस रूप में प्रदर्शित करना

निर्देशक करण जौहर द्वारा निर्देशित स्टूडेंट ऑफ द ईयर में एक्ट्रेस के साथ राधा नाम से गाना फिल्माया। इसमें सेक्सी राधा के शरीर का वर्णन करते हुए गाने पर डांस किया गया। इस पर पूजनीय राधा का वस्तुकरण और तुच्छीकरण करने के लिए आलोचना की गई।

7. रेडी, (3 जून, 2011)

Reddy Movie (Source – Moneycontrol)

फिल्म रेडी के एक दृश्य में एक्टर सलमान खान का किरदार खतना पर मजाक करते हुए एक किरदार की शिखा (हिंदुओं की पारंपरिक चोटी) काट देता है। (तेरी चोटी काटी जा रही है, खतना नहीं किया जा रहा)  इस दृश्य की हिंदू रीति-रिवाजों के प्रति असंवेदनशीलता और पारंपरिक प्रथाओं को अपमानजनक तरीके से धर्मनिरपेक्ष बनाने के प्रयास के लिए आलोचना की गई है।

8. जोधा अकबर (15 फरवरी, 2008)

Jodha Akbar Movie (Garland Magazine)

जोधा अकबर फिल्म के हर दृश्य को लेकर काफी विवाद हुआ। लेखक हैदर अली द्वारा सच दिखाने की चाह से परे संतुलित रखने के लिए काफी लीपपोती की। फिल्म के शुरूआती दृश्य में, पृष्ठभूमि में एक आवाज कहती है, ” हजारों वर्षों तक कितने लोगों ने भारत को लूटा, फिर मुगल आए, जिन्होंने इसे अपना घर बनाया और इससे प्यार किया। “

9. चक दे इंडिया (2007) –  कोच रंजन नेगी को कबीर खान बनाकर प्रस्तुत करना

Chak De India (Source – Netflix)

चक दे इंडिया में, कोच के केरेक्टर असल घटना से लिया गया, जिनका मूल नाम रंजन नेगी था, मगर मूवी में नाम बदलकर कबीर खान किया गया। कोच को मुस्लिम उत्पीड़ित बनाकर दिखाया गया। इसके ऊपर पूरा नैरेटिव फिट किया गया। कुछ लोगों ने इस बीच तर्क दिया था कि यह बदलाव कहानी के हिसाब से पात्रों को हटाने की प्रवृत्ति दिखाता मगर सवाल उठता है कि फिर इसकी विश्वसनीयता किनती कम रह जाती है।

10. मैं हूं ना (30 अप्रैल, 2004) – सैन्य टकराव और आतंकवाद को नोर्मेलाइज करने की कोशिश

इस फिल्म में पाकिस्तान को सामान्य दिखाने, सेना को विभाजित करने और पाकिस्तान विरोधी विचारों को खलनायक के रूप में चित्रित करने का प्रयास करती है। इसे पारित नहीं किया जाना चाहिए था। इसमें भारतीय नागरिक को आतंकवादी के रूप में दिखाया गया। वहीं पाकिस्तान को मित्र बनाकर दर्शाया गया।

11. कल हो न हो (10 मार्च, 2003) सरस्वती भजन की आलोचना मगर कव्वाली की तारीफ

इस फिल्म के एक दृश्य में एक्टर शाहरुख खान (अमन माथुर) ने सरस्वती भजन की आलोचना की है, उसमें बारीक कमियां निकलते दिखे। वहीं अगले ही सीन में सूफी कव्वाली की जमकर तारीफ करते हुए नजर आए। इस सीन पर बाद में जाकर ध्यान दिया गया।

12. मिस्टर एंड मिसेज अय्यर (2002), लव जिहाद दिखाई दिया

इस मूवी में तिलक (हिंदू) को खलनायक के रूप में दिखाया गया है और उसे आतंकवादी के रूप में चित्रित किया गया है। इसमें दिखाया गया कि हिंदू बसों में चढ़कर मुसलमानों और यहूदियों को मार डालते हैं। साथ ही और प्रोपेगेंडा परोसते हुए दिखाया कि एक तमिल ब्राह्मण विवाहित महिला ने दक्षिणपंथी दंगाइयों से एक मुस्लिम व्यक्ति की जान बचाई। जान बचाते समय उसे उस मुस्लिम व्यक्ति से प्यार हो गया। इस फिल्म में भर-भरकर नैरेटिव ठूंसा गया है।

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13. फायर (5 नवंबर, 1998) – दीपा मेहता का विवादास्पद प्रयोग

Fire by Deepa Mehta

दीपा मेहता की फिल्म फायर हिंदी धर्म के धर्म के पारंपरिक प्रतीकों और उपयोग का उदाहरण दिया गया है। फायर फिल्म बेगम जान और रब्बो नामक उपन्यास पर आधारित थी, लेकिन फिल्म में उनके नाम बदलकर राधा और सीता कर दिए गए। राधा और सीता दोनों देवरानी जेठानी हैं, जो एक रूढिवादी भारतीय परिवार के घर में रहती हैं। दोनों बंधनों से ग्रस्त एक दूसरे के प्रति आकर्षण और पनपते प्यार से खुशी और आजादी देखती हैं।

14. कुली (2 दिसंबर, 1983) और मजहब की आड़ में कुछ भी

Coolie Movie

फिल्म में एक्टर अमिताभ बच्चन (इकबाल असलम खान) 786 नंबर का बैज पहनता है। एक लड़ाई के दृश्य में, वह हथौड़ा और दरांती का चिन्ह बनाते हुए कहता है, “यह मजदूर का निशाना” या कुछ इसी तरह का। उसकी मां अस्पताल में भर्ती है हज जाने की योजना बनाती है। मगर हेल्थ खराब होने की वजह से मंजूरी नहीं मिलती। एक गाना बजता है और अंत में एक बिजली चमकती है और वो ठीक हो जाती है।

फिल्म में नायक कम्युनिस्ट हथौड़ा और दरांती के साथ लड़ रहा है जबकि खलनायक एक हिंदू त्रिशूल रखता है। यह काफी विवादास्पद था। एक अन्य डायलॉग – “मदीना वाले को मेरा सलाम कहना” 

फिल्म के अंत में मां अल्लाह से दुआ करती है और तभी एक हरे-लाल रंग की चादर उड़कर इकबाल को ढक लेती है। कादर खान उस पर लगातार गोलियां बरसाता रहता है, लेकिन चादर चमत्कारिक रूप से उसकी रक्षा करती है।  हर गोली पर वो कुरान की कुछ आयते पढ़ता है।

15. दीवार (1975) – धार्मिक प्रतीकों की झलक

पूरी फिल्म में मुख्य किरदार विजय (अमिताभ बच्चन) को 786 नंबर का बैज पहने हुए है। धार्मक प्रतीकों के संयोजन को धर्मनिरपेक्षता के रूप में दिखाते हैं। आखिर में जब गोलियां चलती हैं तो वहीं बैज विजय की जान बचाता है। विजय बैज को चूमकर अपनी आंखों पर लगा लेता है। फिल्म में हीरो को गुस्सैल, हिंदू विरोधी और नास्तिक दिखाया गया है।

17. “राम तेरी गंगा मैली” में छेड़छाड़ को धार्मिक रंग देने की साजिश

फिल्म राम तेरी गंगा मैली के एक सीन में पुजारी नायिका से छेड़छाड़ करता है और ओम नम: शिवाय का जाप करता है। एक धार्मिक व्यक्तित्व द्वारा इस तरह के व्यवहार को दर्शाने की कड़ी आलोचना हुई। साथ ही हिंदू रीति रिवाजों का दोहरा और अपमानजनक चित्रण है।

18. मदर इंडिया (1957) हिंदू आस्था को आहत करने का एक और उदाहरण

Mother India Movie (Bhaskar)

मदर इंडिया में खलनायक सुखी लाला को नायिका के साथ छेड़छाड़ करने से पहले देवी माता की पूजा करते हुए दिखाया गया है। इस चित्रण की निंदा की गई है क्योंकि इसमें धार्मिक आस्था को खलनायकी के बहाने के रूप में इस्तेमाल किया गया है, जिससे धार्मिक हस्तियों की नकारात्मक छवि को बढ़ावा मिलता है।

यह सभी फिल्में बॉलीवुड के उस खास पैटर्न को दिखाती है, जिसमें बार-बार एक खास मैसेज को अलग तरीकों से फीड किया गया। जहां हिंदू पहचान और प्रतीकों को अपत्तिजनक और भ्रामक तरीके से क्रिएटिव लिबर्टी की आड़ में दिखाया गया। इससे धर्म की छवी को धूमिल करने की कोशिश की गई। इससे समझ आता है कि बॉलीविड में निरंतर विकास करने के साथ फिल्म मेकर्स के लिए सांस्कृतिक संवेदनशीलता का सम्मान करना कितना जरूरी है।

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