Menu

छत्तीसगढ़ में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पास, CM विष्णुदेव साय ने बोले- अवैध धर्मांतरण पर लगेगी लगाम

Editor Ritam HindiEditor Ritam Hindi20 Mar 2026, 03:27 pm IST
छत्तीसगढ़ में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पास, CM विष्णुदेव साय ने बोले- अवैध धर्मांतरण पर लगेगी लगाम
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में 19 मार्च 2026 को हिंदू नव वर्ष के पहले दिन ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पारित हो गया। सदन में बिल पास होने पर भाजपा विधायकों ने जय श्री राम के जयकारे लगाए। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसकी खुशी जताई और इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया।

सीएम साय ने कहा कि लंबे समय से गरीबी, अशिक्षा का फायदा उठाकर या प्रलोभन, दबाव और डराकर अवैध धर्मांतरण की घटनाएं होती रही हैं। नया कानून ऐसी अनैतिक गतिविधियों पर लगाम लगाएगा और आस्था, परंपरा तथा सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा करेगा।

सीएम साय के अनुसार, नए कानून में स्वेच्छा से धर्मांतरण के लिए भी नामित अधिकारी (या जिला मजिस्ट्रेट) को कम से कम 60 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य होगा। आवेदन की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और एक निर्धारित प्रक्रिया से जांच होगी कि कहीं प्रलोभन, दबाव या बहला-फुसलावा तो नहीं है। अधिकारी एक महीने के भीतर जांच पूरी कर अनुमति देंगे या अस्वीकार करेंगे।यह विधेयक 1968 के पुराने कानून की जगह लेगा।

इसका मुख्य उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी, गलत जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्मांतरण रोकना है। प्रलोभन में उपहार, मुफ्त शिक्षा, चिकित्सा या बेहतर जीवन का झांसा भी शामिल है।

सजा और जुर्माने के प्रावधान:

सामान्य अवैध धर्मांतरण: दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना।

विशेष वर्गों का धर्मांतरण: यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, SC, ST या OBC वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 साल की जेल और न्यूनतम 10 लाख रुपए जुर्माना।

सामूहिक धर्मांतरण: इस मामले में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और कम से कम 25 लाख रुपए का जुर्माना।

दोबारा अपराध करने पर: अगर कोई व्यक्ति पहले सजा काट चुका है और फिर से अवैध धर्मांतरण कराते पकड़ा जाता है, तो उसे आजीवन कारावास होगा।

मददगारों पर कार्रवाई: अवैध धर्मांतरण में मदद करने वालों को 6 महीने से 3 साल तक की सजा और 2 लाख रुपए का जुर्माना।

कानून के अन्य महत्वपूर्ण नियम:

पूर्व सूचना अनिवार्य: स्वेच्छा से धर्म बदलने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला कलेक्टर को आवेदन देना होगा।

धर्म गुरुओं के लिए नियम: धर्मांतरण का अनुष्ठान कराने वाले पादरी, मौलवी या पुजारी को भी 2 महीने पहले प्रशासन को सूचित करना होगा।

अवैध घोषित होना: बिना पूर्व सूचना के किया गया कोई भी धर्मांतरण ‘अवैध’ माना जाएगा और इसमें तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान है।

शादी के लिए धर्मांतरण: यदि विवाह केवल धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया है, तो कोर्ट उसे ‘शून्य’ (Invalid) घोषित कर देगा।

लव जिहाद पर रोक: लव जिहाद जैसी साजिशों को रोकने के लिए विवाह पूर्व धर्म परिवर्तन की जांच खुद जिला मजिस्ट्रेट करेंगे।

विदेशी फंडिंग पर रोक: धर्मांतरण के खेल में शामिल विदेशी फंडिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

संस्थाओं का पंजीकरण: यदि कोई संस्था प्रलोभन या सामूहिक धर्मांतरण में शामिल पाई गई, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा।

विशेष अदालतों का गठन: इन मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए हर जिले में विशेष अदालतें गठित की जाएंगी।

समय सीमा: सरकार का लक्ष्य है कि धर्मांतरण से जुड़े मामलों का निपटारा 6 महीने के भीतर किया जाए।

साय सरकार का कहना है कि बस्तर, जशपुर, रायगढ़ जैसे आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ते विवादों के कारण यह कड़ा कानून जरूरी था।सीएम साय ने उम्मीद जताई कि इस नए कानून से प्रदेश में सामाजिक संतुलन, पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चिति होगा।

Related News