FCRA संशोधन विधेयक 2026:नए नियमों के विरोध में उतरी ईसाई मिशनरी, कन्वर्जन से लेकर विदेशी फंडिंग पर कैसे कसेगा शिकंजा?

मोदी सरकार ने 25 मार्च, 2026 को लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य विदेशों से प्राप्त धन की पारदर्शिता को बढ़ाना और उपयोग को सुनिश्चित करना है। इसके अनुसार विदेशों से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए गैर सरकारी संगठनों (NGO) को FCRA के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इससे जहां एक तरफ एनजीओ की जबावदेही सुनिश्चित होगी तो वहीं ईसाई धर्म प्रचारकों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर भी लगाम लगेगी।
मगर इससे इतर कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रैंस ऑफ इंडिया और ईसाई मिशनरी इस विधेयक का लगातार विरोध कर रही हैं और इसे निजी संस्थाओं में हस्तक्षेप बता रही हैं।
क्या है FCRA संशोधन विधेयक?
बता दें कि Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 साल 2010 के विदेशी अंशदान विनियमन कानून का ही संशोधन है। इसे साल 2016, 2018 और 2020 में संशोधित किया गया है। नए विधेयक का मूल उद्देश्य विदेशी फंड का प्रबंधन, इन फंडों से निर्मित संपत्तियों, जांच प्रक्रियाओं और संगठन के पंजीकरण से जुड़े मामलों के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा उपलब्ध कराना है। इसमें गैर सरकारी संगठनों, ट्रस्टों, समितियों और अन्य संस्थानों की जवाबदेही और राज्य की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया है।
बता दें कि मूल कानून (2010) में केवल पैसे के आने-जाने को नियंत्रित करने का ही प्रावधान था। इसमें संपत्तियों को लेकर कोई कानूनी ढांचा नहीं था, जिसका नए कानून में उल्लेख किया गया है।
FCRA संशोधन विधेयक के प्रमुख प्रावधान
इस विधेयक का प्रमुख प्रावधान एक नामित अथॉरिटी की स्थापना करना है, जिसका काम खास परिस्थितियों में विदेशी फंडिंग और संपत्तियों पर निगरानी रखना होगा। यदि कोई एनजीओ या संगठन एफसीआरए के तहत रद्द, सरेंडर, खत्म या नवीनीकृत नहीं होता है तो उसकी फंडिंग या प्रोपर्टी इसी अथॉरिटी को ट्रांसफर कर दी जाएगी।
ये संपत्तियां पहले अस्थायी रूप से अथॉरिटी के पास रहेगी और बाद से स्थायी रूप से सरकार के नियंत्रण में आ सकती है।
विधेयक ने एनजीओ में Key Functionary की परिभाषा को बढ़ा दिया है। यानी इसमें अब केवल ऑफिस मालिक और डायरेक्टर ही नहीं बिल्कि डायरेक्टर, ट्रस्टी, पार्टनर, सोसाइटी, ट्रेड यूनियन, एसोसिएशन की गवर्निंग बॉडी या कमेटी का सदस्य नियंत्रण करता है तो वो भी जवाबदेह होगा।
इस विधेयक के अंतर्गत NGO को विदेशी योगदान से बनी किसी भी संपत्ति को बेचने, गिरवी रखने या किसी अन्य तरीके से इस्तेमाल करने से पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेनी होगी।
इन प्रावधानों के तहत अगर समय रहते रिन्यूअल आवेदन जमा नहीं किया या केंद्र ने रिजेक्ट कर दिया तो प्रमाणपत्र की वैधता खत्म होते ही उसे समाप्त कर दिया जाएगा। जिस एनजीओ का प्रमाण पत्र खत्म हो गया है, वो विदेशी योगदान न तो प्राप्त कर पाएगा और न ही इस्तेमाल। इसके लिए पहले उसे रिन्यू करना पड़ेगा।
यदि नियुक्त अथॉरिटी को हस्तांतरित संपत्ति का कोई हिस्सा पूजा स्थल है, तो उसकी धार्मिक प्रकृति बनाए रखना अनिवार्य होगा। इसके प्रबंधन या संचालन के लिए किसी नामित व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, निर्धारित शर्तों के साथ। इस निर्णय को केवल अदालत में (90 दिन) ही चुनौती दी जा सकेगी।
विधेयक में सजा को तर्क संगत बनाने का सुझाव हैं – FCRA उल्लंघन के लिए सजा को पहले के 5 सालों से घटाकर 1 साल, जुर्माना या दोनों पर फोकस किया है। सरकार ने इसे दंडों का युक्तिकरण बताया है।
यदि कोई संगठन बंद हो जाता है, निष्क्रिय हो जाता है या उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है, तो इस स्थिति में विदेश फंड और उससे जुड़ी संपत्तियां उस एनजीओं के माध्यम से स्थायी तरीके से सरकार के पास जाएंगी।
सरकार के अनुसार वर्तमान में, लगभग 16,000 एनजीओ रजिस्टर्ड हैं और हर साल लगभग 22,000 करोड़ रुपये प्राप्त करते हैं।
FCRA संशोधन विधेयक के बाद ईसाई मिशनरियों पर कैसे कसेगी लगाम?
FCRA संशोधन विधेयक, 2026 का कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCA) ने गंभीर आपत्ति जताते हुए विरोध किया है। बिशपों ने चेतावनी दी कि ये लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर सकता है और न्याय का उल्लंघन कर सकता है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी 26 मार्च, 2026 को सोशल मीडिया पर ट्वीट कर बताया कि केरल के चांगनास्सेरी के आर्कबिशप ने FCRA संशोधन विधेयक पर चिंता जताई। उन्होंने इसे केरल के ईसाई संस्थानों पर गंभीर प्रभाव के रूप में प्रस्तुत किया।
यहां सवाल ये उठता है कि जब ये संशोधन विधेयक पूरे देश के एनजीओ और संगठनों को ध्यान में रखकर लाया गया है, तो ईसाई मिशनरियों को इससे आपत्ति क्या है? क्या धर्मांतरण कराने वाले ईसाई संगठन विदेशी फंडिंग पर निर्भर हैं?
दरअसल, लंबे समय से कई एनजीओ और ईसाई धर्म प्रचार संगठन भारत में दिए गए काम करते हैं, इसके लिए उन्हें मौटी विदेशों से फंडिंग प्राप्त होती है। ये संगठन कल्याण के कामों की आड़ में कर्नवर्जन और उससे जुड़ी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इसके लिए नौकरी, प्रेम और धन जैसे कई हथकंडे अपनाए जाते हैं और इस पर लगने वाले पैसों की आपूर्ति विदेशों से होती है।
सरकार ने समय-समय पर ईसाई मिशनरियों, संगठनों को FCRA के तहत चंदा लेने की अनुमति पर रोक लगाई है। साथ ही कई जगहों पर लाइसेंस भी रद्द हुए हैं। इसमें बड़े पैमाने पर जनजातिय समुदायों को निशाना बनाया गया, नीचे ऐसे मामलों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां सरकार ने क्रिश्चन एनजीओ के लाइसेंस कैंसिल किए हैं।
ईसाई धर्म प्रचारक संगठन विदेशी फंडिंग पर क्यों निर्भर हैं?
ईसाई मिशनरियों को अपनी गतिविधियां संचालित करने के लिए बड़े पैमाने धन की जरूरत होती है। ऊपर से इसे गरीब सहायता, शिक्षा, चिकित्सा और बुनियादी ढांचे के रूप में उल्लेखित किया जाता है मगर अंदर की सच्चाई बिल्कुल अलग होती है।
इंडिया फेक्ट की 2015 की रिपोर्ट के अनुसार FCRA के माध्यम से प्राप्त होने वाली धनराशि (कुल लगभग11 हजार करोड़ रुपये) उन NGO को मिलते हैं जो FC6 रिटर्न में खुद को ईसाई बताते हैं। इससे साफ होता है कि पश्चिमी दानदाताओं की तरफ से ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार को योगदान दिया जाता है।
1. तमिलनाडु के ईसाई मिशनरी समूह जीसस रिडीम्स का FCRA लाइसेंस रद्द (17 मार्च, 2024)
तमिलनाडु स्थित विवादास्पद ईसाई मिशनरी संगठन जीसस रिडीम्स का केंद्र सरकार ने एफसीआरए का लाइसेंस कैंसिल कर दिया। इसका नेतृत्व मोहन सी. लायरस कर रहे थे। इस पर धर्मांतरण की गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप लगे थे। इस पर एफआईआर में भारतीय दंड सहिंता की धारा 153, 153(ए) और (बी) 295-ए, 505(1)(बी) और 505(2) का उल्लेख किया गया था।
2. तमिलनाडु सोशल सर्विस सोसाइटी का एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया (3 फरवरी, 2025)
केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के सोशल सर्विस सोसाइटी पर एक्शन लेते हुए उसका एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया। टीएनएसओएसएस (TNSOSS) कहा जाता है, तमिलनाडु कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस के तत्वावधान में एक ईसाई गैर-सरकारी संगठन है। ये एनजीओं एक सामाजिक संगठने के रूप में पंजीकृत था, इसकी गिनती 100 से अधिक स्वैच्छिक ईसाई समूहों में होती थी।
3. ईसाई संगठन वर्ल्ड विजन इंडिया का FCRA लाइसेंस हुआ कैंसिल, (24 जनवरी, 2024)
केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े ईसाई संगठन वर्ल्ड विजन इंडिया पर विदेशी चंदा लेने पर प्रतिबंध लगा दिया। उस एनजीओ पर एफसीआरए अधिनियम के नियमों के उल्लंघन का आरोप था। इस पर कार्यवाई करते हुए सरकार ने ये बड़ी कार्रवाई की थी।
इसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। धन के दुरूपयोग करने के आरोपों के बीच एनजीओ पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) जांच की मांग भी उठी थी।
5. 4 ईसाई संगठनों का एक साथ FCRA सर्टिफिकेट रद्द किया गया (14 अक्टूबर, 2023)
गृह मंत्रालय ने धार्मिक उद्देश्यों के लिए विदेशों से फंड पाने वाले 4 ईसाई एनजीओ का लाइसेंस कैंसिल किया। इन सभी पर धार्मिक गतिविधियों को चलाने और एफसीआरए के नियमों के उल्लंघन का आरोप है। 2023 में चारों संगठनों पर बैन लगाया गया था। इनके नाम इस प्रकार से हैं –
- शेकिना प्रोफ़ेटिक मिशन ट्रस्ट (तमिलनाडु),
- होली बेराका मिनिस्ट्रीज़ (कर्नाटक),
- कश्मीर इवेंजेलिकल फ़ेलोशिप,
- बेथेल चैरिटेबल ट्रस्ट (दोनों जम्मू और कश्मीर)।
6. क्रिश्चियन इवेंजिकल संगठन हेवन्ली ग्रेस मिनिस्ट्रीज का एफसीआरए लाइसेंस कैंसिल किया गया (28 अप्रैल, 2022)
सरकार के गृह मंत्रालय की तरफ से हेवेन्ली ग्रेस मिनिस्ट्री नामक ईसाई संगठन का पंजीकरण लाइसेंस हटा दिया गया। इस पर आरोप था कि इसने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) 2010 के प्रावधानों का उल्लंघन किया। अन्य संगठन जिनके लाइसेंस कैंसिल हुए –
हेवनली ग्रेस मिनिस्ट्रीज और पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन फॉर एम्पावरमेंट ऑफ ट्राइबल्स (पीओईटी) समेत कई अन्य
7. कर्नाटक और तमिल में 2 क्रिश्चियन एनजीओ का लाइसेंस पद्द किया गया। (12 दिसंबर, 2021)
गृह मंत्रालय ने कार्रवाई करते हुए दो ईसाई मिशनरियों का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया। इन पर आरोप था कि ये प्रतिबंधित संगठन विदेशों से मोटी रकम फंडिंग के रूप में प्राप्त कर रहा था। इसके साथ ये एफसीआरए नियमों का उल्लंघन भी कर रहा था।
- न्यू होप फाउंडेशन (तमिलनाडु)
- होली स्पिरिट मिनिस्ट्रीज़ (कर्नाटक स्थित)
8. आंध्र प्रदेश के एनजीओ हारवेस्ट इंडिया का लाइसेंस हुआ कैंसिल (सितंबर 2021)
भारत में इवेंजिकल गतिविधियां बढ़ाने और धखाधड़ी से धन जुटाने के आरोप में आंध्र प्रदेश के एनजीओ हारवेस्ट इंडिया का लाइसेंस कैंसिल हुआ। सरकार ने इन सभी आरोपों और अवैध धर्मांतरण की गतिविधियों को देखते हुए एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया। इसकी जानकारी केंद्र सरकार की वेबसाइट पर शेयर की गई।
9. ‘धार्मिक धर्मांतरण’ के आरोप में 13 NGOs के FCRA लाइसेंस रद्द (8 सितंबर, 2020)
आदिवासी बहुल क्षेत्रों में धर्मांतरण के आरोपों में कार्रवाई करते हुए सरकार ने 13 NGO के लाइसेंस हुए रद्द कर दिया है। साथ ही उनसे जुड़े सभी बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन पर धार्मिक धर्मांतरण के आरोप लगे थे।
10. केंद्र सरकार ने 6 ईसाई प्रचारक संगठनों की विदेशी फंडिंग पर सख्ती बरती (6 सितंबर, 2020)
सरकार ने धर्मांतरण और एफसीआरए के नियमों का उल्लंघन करने के आरोपों पर 4 ईसाई प्रचारक संगठनों के लाईसेंस को कैंसिल कर दिया है। इनके नाम इस प्रकार से हैं –
▪ Ecreosoculis North Western Gossner Evangelical(झारखंड)
▪ Evangelical Churches Association (मणिपुर)
▪ Northern Evangelical Lutheran Church (झारखंड)
▪ New Life Fellowship Association (मुंबई)
11. तीन NGOs और एक चर्च पर विदेशी फंड लाने पर रोक, लाइसेंस कैंसिल (2017)
सरकार की तरफ से एक्शन लेते हुए 3 एनजीओ और एक चर्च का लाइसेंस रद्द कर दिया। इन पर अवैध विदेशी फंडिंग और 2010 के FCRA के नियमों के उल्लंघन का आरोप था। सरकार ने इन अवैध गतिविधियों को देखते हुए ये सख्त कदम उठाया।
▪ अयाना चैरिटेबल ट्रस्ट (पहले Gospel For Asia)
▪ Love India Ministries
▪ Last Hour Ministry
यह भी पढ़ें – मातृ शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी में भारत अव्वल, जानें माताओं और शिशुओं को स्वस्थ बनाने वाली केंद्र सरकार की 10 पहलें
यह भी पढ़ें – तिब्बती संस्कृति पर ‘चीनीकरण’ का शिकंजा: समझें कैसे नए जातीय एकता कानून से चीन में खत्म हो जाएगी अल्पसंख्यक पहचान?











