विरासत के प्रतीक हिंदू मंदिर, 10 कहानियों से समझें कैसे भिक्षुक, विधवा और ट्रांसजेंडर महिलाओं ने दिल खोलकर किया दान

हिंदू मंदिर हमेशा से ही भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र रहे हैं। स्वर्णिम इतिहास और समृद्धता के केंद्र मंदिर प्राचीन भारत में न केवल आस्था के केंद्र होते थे, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था का संचालन भी यहीं से होता था। प्राचीन काल में मंदिरों के निर्माण आमतौर पर राजा द्वारा ही करवाया जाता था और बाकी आमजन सहयोग करते थे। मगर समय बदलने के साथ शासक यानी राजा का कॉन्सेप्ट पुराना हो चला और लोकतंत्र की नींव रखी गई। वर्तमान में मंदिरों का निर्माण मुख्य रूप से सरकारी अनुदान, ट्रस्ट और जन भागीदारी से संभव होता है। ऐसे में लोग भी बढ़चढ़ कर मंदिरों के निर्माण में योगदान करते हैं।

रेणुका येलम्मा मंदिर, कर्नाटक (Source – Daccan Chronicle)
भक्त चंदा, दान आदि के माध्यम से बड़ी संख्या में मंदिरों को राशि दान करते हैं, मगर इस बीच कुछ ऐसी कहानियां भी सामने आती हैं, जो मिसाल बन जाती हैं। दरअसल, 3 मार्च, 2026 को कर्नाटक के गडग जिले के तिम्मापुर गांव में गृह लक्ष्मी योजना के तहत 300 महिला लाभार्थियों ने मिलकर 1 करोड़ की लागत से बन रहे रेणुका येलम्मा मंदिर को पुनर्जिवित करने का फैसला किया। उन्होंने अपनी 2,000 रुपये की सहायता राशि से 17 लाख रुपये एकत्रित किए और इस कदम में अन्य 850 महिलाओं को भी सहयोग की प्रेरणा मिली।
बता दें हम्पी शैली में बन रहे इस मंदिर की शुरूआत लगभग 4 साल पहले हुई थी, मगर बाद में लगातार आर्थिक परेशानियों के चलते काम ठप्प पड़ गया। मंदिर का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और बाकी बचे 30 प्रतिशत कार्य अगले 5 महीने में पूरा होने की उम्मीद है।
महिलाओं का यह सहयोग भक्ति, आस्था और उदारता की अलग मिसाल प्रस्तुत कर रहा है। हालांकि यह कोई पहला मामला नहीं है, इतिहास भी ऐसी महान स्मृतियों और कहानियों से भरा पड़ा है। आदि गुरु शंकराचार्य से लेकर रानी अहिल्या बाई होल्कर तक, ऐसे कई महान व्यक्तित्व हुए जिन्होंने अपना पूरा जीवन मंदिरों के निर्माण, दान और जीर्णोंद्धार में लगा दिया। नीचे कई राज्यों की महिलाओं द्वारा किए किए 10 प्रमुख मंदिर योगदानों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर छोटी-छोटी बचत से आस्था और परोपकार का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया।
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1.वेंकटेश्वरम्मा ने नंदीयाल में राम मंदिर को 2 करोड़ रुपये की भूमि दान में दी
26 जनवरी, 2026 में आंध्र प्रदेश के नंदियाल जिले के जयदुर्गम गांव में बुजुर्ग दंपत्ति वीरभद्रुडु और उनकी पत्नी वेंकटेश्वरम्मा ने अपने जीवन भर की गाढ़ी कमाई से अर्जित की गई भूमि राम मंदिर को दान कर दी। 9 एकड़ इस भूमि की कीमत 2 करोड़ रुपये है। बता दें कि दोनों की कोई संतान नहीं है और उम्र के इस पड़ाव पर आकर बुजुर्ग दंपत्ति ने आस्था की अनूठी मिसाल दी, जो कई लोगों को प्रेरित करेगी।
2. भिखारी महिला रंगम्मा ने रायचूर में मंदिर के नवीनीकरण के लिए ₹1.83 लाख का दान दिया
11 अगस्त, 2025 जब भी दान या परोपकार की बात का विचार आता है तो आर्थिक रूप से समृद्ध व्यक्ति की छवि सामने आती है। मगर रायचूर में एक भिक्षुक महिला रंगम्मा ने इसे गलत साबित कर दिया। उन्होंने पूरे जीवन भीख मांगकर बचाए गए 1 लाख 83 हजार रुपये मंदिर के नए ध्वज स्तंभ निर्माण के लिए दान कर दिए। जब रंगम्मा ने अपने जीवनभर की पूंजी एक थैली में भरकर गांव वालों को दान दी तो यह देखकर लोग भावुक हो गए। इससे पहले भी रंगम्मा शिव मंदिर निर्माण के लिए 3 लाख रुपये दान दिए थे।
3. 70 वर्षीय महिला भिक्षुक तुला बेहरा ने अपनी जीवन भर की बचत एक मंदिर को दान कर दी
उड़ीसा के कंधमाल जिले के फूलबानी स्थित जगन्नाथ मंदिर 2022 में भिक्षुक तुला बेहेरा (तुला मौसी) ने जगन्नाथ मंदिर के कुछ हिस्सों के जीर्णोद्धार के लिए जीवन भर की बचत के 1 लाख रुपये दान दे दिए। तुला मौसी के त्याग और समर्पण को देखते हुए 16 जनवरी, 2025 को उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्र सरकार के 2025 के आधिकारिक कैलेंडर में स्थान मिला। बता दें कि तुला मौसी ने मंदिर के पास 5 वर्षों तक भीख मांगकर धनराशि जमा की थी, जिसे भगवान को ही समर्पित कर दिया। उनके इस निस्वार्थ योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

पीएम मोदी के साथ केंद्रीय कैलेंडर में छपी तुला बेहरा की तस्वीर
4. कोप्पल गांव की महिलाओं ने गृह लक्ष्मी मंदिर के निर्माण के लिए धनराशि दान की
7 सितंबर, 2024 में कर्नाटक के कोप्पल जिले के हिरेबिदानल गांव में गृह लक्ष्मी योजना की लाभार्थी महिलाओं ने आस्था और भक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। 50 महिलाओं ने अगस्त महीने की प्रत्येक 2,000 रुपये की धनराशि को श्री शरणबसवेश्वर मंदिर के निर्माण के लिए दान दे दिया। उनका योगदान ऐसे वक्त आया था जब मंदिर के निर्माण में पैसों की कमी से देरी हो रही थी। महिलाओं ने फिर ऐसा विकल्प चुना , जिसने सभी का ध्यान खींचा।
महिलाओं के इस योगदान के लिए महिला एवं बाल कल्याण मंत्री ने उनकी पहल और सामुदायिक भावना की प्रशंसा की।
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5. हिमाचल की महिलाओं ने दुर्गा देवहारी मंदिर के निर्माण के लिए धनराशि का योगदान दिया
18 मई, 2023 को हिमाचल प्रदेश की सैंज घाटी के बनोगी कोठी गांव में महिला श्रद्धालुओं और स्थानीय महिला समूहों ने दुर्गा देयोहारी मंदिर निर्माण में सक्रिय सहयोग दिया। कई महिलाओं ने ₹18,000, ₹10,301 और ₹5,500 जैसी राशियां दान कीं।
आर्थिक मदद के अलावा उन्होंने भजन-कीर्तन में भाग लिया और मंदिर के अनुष्ठानों के लिए लकड़ी जैसे संसाधन भी उपलब्ध कराए। यह पहल धार्मिक परियोजना में महिलाओं की मजबूत सामुदायिक भागीदारी को दर्शाती है।
6. माता अरुंधति ने विजयनगरम में श्री राम समता श्री सत्यनारायण स्वामी मंदिर के लिए 1.3 एकड़ जमीन दान दी
साल 2023 में मंदिरों के प्रति भक्तों की उदारता का एक ऐसा ही मामला सामने आया, जब आंध्र प्रदेश में माता अरुंधति ने विजयनगरम के बाहरी इलाके गजुलारेगा में श्री राम समेता श्री सत्यनारायण स्वामी मंदिर के निर्माण के लिए 1.3 एकड़ भूमि दान की। उनके इस योगदान से मंदिर परियोजना की नींव पड़ी और सत्य आश्रम ट्रस्ट को निर्माण कार्य आगे बढ़ाने में मदद मिली।
बता दें कि करीब 1.3 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए ट्रस्टियों ने लगभग 90 लाख रुपये जुटा लिए थे, लेकिन भूमि दान मंदिर निर्माण को संभव बनाने वाला सबसे महत्वपूर्ण योगदान साबित हुआ। यह उनके गहरे धार्मिक विश्वास और सामुदायिक विकास के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
7. बुजुर्ग भिक्षुक महिला ने राजराजेश्वरी मंदिर को दान दिए 1 लाख रुपये
अप्रैल 2022 में परोपकार और उदारता का एक अद्भुत मामला सामने आया। कर्नाटक के दक्षिणी कन्नण और उडुपी जिलों में मंदिरों के द्वार पर भिक्षा मांगकर जीवनयापन करने वाली अश्वथम्मा (80 वर्षीय) राजराजेश्वरी मंदिर को 1 लाख दान दिए। बुजुर्ग महिला के पति की मौत 18 साल पहले हो गई थी, जिसके बाद वो विभिन्न मंदिरों में भिक्षाटन से जीवनयापन करती हैं। अश्वथम्मा ने ये राशि अन्नदान के लिए सौंपी और कहा कि उन्हें ये पैसे समाज से मिले हैं, जिसे वो वापस लौटा रही हैं। यह आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उनकी दृढ़ धार्मिक प्रतिबद्धता और निस्वार्थ दान को दर्शाती है।
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8. विधवा महिला ने मंदिर में किया एक करोड़ का गुप्त दान, की पति की अंतिम इच्छा पूरी
अगस्त 2021 में महाराष्ट्र के सोलापुर जिले की एक महिला ने अपने दिवंगत पति की अंतिम इच्छा पूरी करते हुए पंढरपुर स्थित श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर ट्रस्ट को 1 करोड़ रुपये का गुप्त दान दिया। कोविड-19 से पति के निधन के बाद महिला ने अलग-अलग तारीखों के कई चेक मंदिर प्रशासन को सौंपे। उन्होंने बताया कि उनके पति चाहते थे कि उनकी बीमा राशि भगवान विट्ठल को समर्पित कर दी जाए। छह साल की बेटी की मां इस महिला ने अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया।
9. जालंधर में महिलाओं ने श्री राम मंदिर निर्माण के लिए चलाया धन संग्रह अभियान
फरवरी, 2021 में रजनी खुल्लर ने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर श्री राम मंदिर (अयोध्या) के निर्माण हेतु धन जुटाने के लिए घर-घर अभियान चलाया। इस अभियान में बच्चों से लेकर बड़ों और बुजुर्गों ने भी योगदान दिया। एकत्रित धनराशि को अयोध्या मंदिर निर्माण के लिए अग्रेषित करने से पहले स्थानीय मंदिर प्रतिनिधियों को सौंप दिया गया, जो मंदिर के पूर्ण होने के 500 साल पुराने सपने के प्रति मजबूत सामुदायिक भागीदारी और समर्पण को दर्शाता है।
10. राजस्थान की ट्रांसजेंडरों ने अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए दान दिए लाखों रुपये
29 जनवरी, 2021 में राजस्थान की ट्रांसजेंडर महिलाओं ने उदारता की एक अनोखी कहानी रची। 20 ट्रांसजेंडरों ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए लाखों रुपये दान कर दिए और इसे एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण बताया।
- इनमें मेवाड़ क्षेत्र की रेखा बुआजी ने 5,11,111 रुपये दान किए और मंदिर निर्माण के लिए समाज से एकता का आह्वान किया।
- ब्यावर की किरणबाई ने 3,21,000 रुपये का योगदान दिया और राम राज्य देखने के अपने सपने को व्यक्त किया।
- कुम्हेर की एक ट्रांसजेंडर, रिया कुमारी ने राम मंदिर निर्माण के लिए 1,01,000 रुपये दान किए।
- राजसमंद के चारभुजा की ममता भी मंदिर निर्माण के लिए 1,51,000 रुपये दान करने वाली अन्य ट्रांसजेंडर बनीं।
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