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गणतंत्र दिवस परेड पर CRPF की सहायक कमांडेंट सिमरन बाला रचेंगी इतिहास, जानें भारत की महिला शक्ति का सामर्थ्य

Editor Ritam HindiEditor Ritam Hindi23 Jan 2026, 02:01 pm IST
गणतंत्र दिवस परेड पर CRPF की सहायक कमांडेंट सिमरन बाला रचेंगी इतिहास, जानें भारत की महिला शक्ति का सामर्थ्य
सिमरन बाला CRPF पुरुषों की यूनिट का करेंगी नेतृत्व

भारत 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। राजधानी नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर इस बार नया इतिहास रचने वाला है। 26 साल की सहायक कमांडेंट सिमरन बाला भव्य परेड में पूरी तरह से पुरुषों वाली CRPF टुकड़ी का नेतृत्व करेंगी। यानी गणतंत्र दिवस परेड के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) पुरुषों की यूनिट (जिसमें 140 से ज्यादा पुरुष कर्मी शामिल हैं) का नेतृत्व कोई महिला अधिकारी करेंगी। सिमरन बाला के चयन पर उनके परिवार में खुशी का माहौल है, तो देश की महिलाएं खुद को गौरवांवित महसूस कर रही है।

आइए जानते हैं- सिमरन बाला कौन हैं? वह कहां की रहने वाली हैं? परेड का नेतृत्व करने के लिए उनका चयन कैसे हुआ? वहीं CRPF में महिलाओं की भागीदारी और गणतंत्र दिवस परेड में महिलाओं के सार्मथ्य और शौर्य की गाथा को जानेंगे।

सिमरन बाला कहां की रहने वाली हैं?

सिमरन बाला केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले स्थित नौशेरा की रहने वाली हैं। नौशेरा पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के LoC (लाइन ऑफ कंट्रोल) के पास स्थित एक तहसील है। सिमरन बाला की 1 बहन और 1 भाई है। सिमरन का बचपन पाकिस्तान की ओर से होने वाली गोलीबारी के साये में बीता। उन्होंने सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। कठिन जीवन को अपनी ताकत बनाया। रोजाना सीमापार से होती नापाक हरकतों के अनुभव ने उन्हें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के माध्यम से देश सेवा करने के लिए प्रेरित किया।

सिमरन बाला (Photo Credited: NDTV)

 सिमरन बाला की शैक्षिक योग्यता क्या है?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिमरन बाला ने 10वीं क्लास तक शिक्षा नौशेरा के नेशनल पब्लिक स्कूल से ही पूरी की। इसके बाद वह उच्च शिक्षा (11th-12th) के लिए जम्मू चली गईं। उन्होंने जम्मू के गांधी नगर स्थित सरकारी महिला कॉलेज से राजनीतिक विज्ञान में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। सिमरन ने ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में UPSC (CAPF) परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। उन्होंने 82वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की थी। उस वर्ष (जून 2023) में वह जम्मू-कश्मीर से क्वालिफाई करने वाली एकमात्र महिला कैंडिडेट थीं। वे अपने जिले से CRPF में अधिकारी बनने वाली पहली महिला भी हैं।

 कब CRPF में हुईं शामिल?

अप्रैल 2025 में उन्हें सीआरपीएफ में शामिल किया गया। उनकी पहली तैनाती छत्तीसगढ़ के बस्तारिया बटालियन में हुई। यहां पर उन्हें नक्सल विरोधी अभियानों की जिम्मेदारी सौंपी गई। बता दें गुरुग्राम स्थित CRPF अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान सिमरन बाला को बेस्ट ऑफिसर और पब्लिक स्पीकिंग के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

 कैसे मिली पुरुष यूनिट की कमान?

गणतंत्र दिवस परेड में रिहर्सल के दौरान उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 140 पुरुष की टुकड़ी को लीड़ करने का फैसला लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, ड्रिल के दौरान उनका आत्मविश्वास, सटीकता और कमांड सबसे अलग थी। यही कारण है कि उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। एक निजी चैनल से बात करते हुए सिमरन ने कहा कि इंडिया गेट के सामने परेड का नेतृत्व करना, देश के सबसे बड़े दिन पर इस जिम्मेदारी को निभाना मेरे लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी की भी  बात है।

सिमरन बाला (Photo Credit NDTV)

CRPF में कितनी महिलाएं कार्यरत हैं?

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ में करीब 3.25 लाख जवान हैं। इनमें भी महिला सिपाहियों की संख्या 10,086 है।  गृह मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2016 में यह निर्णय लिया गया था कि  सीआरपीएफ और सीआईएसएफ में महिला सिपाहियों के लिए 33 प्रतिशत पद आरक्षित किए जाएंगे। यह लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

CRPF में महिला पुलिसकर्मी (Photo Credited: Dainik Jagran)

सीआरपीएफ में पहली बार महिलाओं की भर्ती कब हुई थी?

CRPF में 1986 में महिलाओं की भर्ती शुरू हो गई थी। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) अर्धसैनिक बलों में एकमात्र ऐसा बल है, जिसमें कुल 5 महिला बटालियनें हैं, जो महिलाओं के सशक्तीकरण और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने के लिए स्थापित की गईं। पहली महिला बटालियन 88 (महिला) बटालियन की स्थापना 1986 में दिल्ली मुख्यालय के साथ हुई, जिसका प्रशिक्षण मार्च 1987 में पूरा होने के बाद मेरठ दंगों और श्रीलंका में आईपीकेएफ ऑपरेशन में सराहनीय योगदान दिया। इसकी सफलता के बाद, दूसरी 135 (महिला) बटालियन 1995 में गांधीनगर (गुजरात) में, तीसरी 213 (महिला) बटालियन 2011 में नागपुर (महाराष्ट्र) में, और आगे तीन नई बटालियनें- 232 (महिला) 2014-15 में अजमेर में, 233 (महिला) 2015-16 में, तथा 240 (महिला) 2016-17 मेंस्थापित की गईं।

वर्तमान में ये महिला कार्मिक जम्मू-कश्मीर, अयोध्या, मणिपुर, असम, LWE क्षेत्रों आदि में सक्रिय ड्यूटी पर तैनात हैं तथा प्रत्येक आरएएफ बटालियन में 96 महिला कार्मिक भी शामिल हैं, जिससे महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से जुड़े अपराधों और आंदोलनों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा रहा है।

इसके अलावा वर्ष 2022 में सीआरपीएफ ने पहली बार दो महिला अधिकारियों को प्रोमोट कर महानिरीक्षक (आईजी) बनाया था। IG सीमा धुंडिया को सीआरपीएफ के बिहार सेक्टर का नेतृत्व करने का जिम्मा दिया तो वहीं IG एनी अब्राहम को  रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को लीड करने का मौका मिला।

CRPF का क्या काम होता है?

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) देश का सबसे बड़ा आतंरिक सुरक्षा बल है। इसकी स्थापना 27 जुलाई 1939 को क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस के रूप में हुई थी। 28 दिसंबर, 1949 को संसद के एक अधिनियम के माध्यम से इसका नाम बदलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल कर दिया गया। अब इसमें 246 बटालियनें हैं। वर्तमान में CRPF एक केंद्रीय बल है, जो गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है। वर्तमान में इसके डीजीपी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह हैं। फोर्स को जम्मू, कोलकाता, हैदराबाद और गुवाहाटी में स्थित चार क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।

इसके जवानों को नक्सल विरोधी अभियान, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान और नॉर्थ-ईस्ट में उग्रवाद विरोधी अभियानों में शामिल किया जाता है। कभी-कभी देश में दंगों और देश-विरोधी गतिविधियों को काउंटर करने में सीआरपीएफ जवानों को सुरक्षा में तैनात किया जाता है।

गणतंत्र दिवस परेड में महिलाओं की भागीदारी की शुरूआत कब से हुई?

गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय महिलाओं ने अपनी ताकत और सशक्तिकरण को बार-बार प्रदर्शित किया। 2015 में पहली बार थल सेना, वायु सेना और नौसेना की पूरी महिला टुकड़ियां मार्च पास्ट में शामिल हुईं। 2016 में सीआरपीएफ की महिला स्टंट दल ने पहली बार प्रदर्शन किया। 2018 में बीएसएफ की 27 महिला डेयरडेविल्स ने बाइक स्टंट दिखाए। 2019 में असम राइफल्स की महिला टुकड़ी ने भाग लिया, जिसका नेतृत्व मेजर खुशबू कंवर ने किया। 2020 में तानिया शेरगिल पहली महिला परेड सहायक बनीं। 2021 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कंठ पहली महिला फाइटर जेट पायलट के रूप में शामिल हुईं। 2022 में शिवांगी सिंह राफेल पायलट के तौर पर झांकी में रहीं। 2023 में थीम ‘नारी शक्ति’ रही, जिसमें नौसेना की महिला क्रू और सीआरपीएफ की महिला बटालियन शामिल हुईं। वहीं 2024 में परेड पूरी तरह महिला-केंद्रित थी, जिसमें पहली बार 144 सदस्यीय त्रि-सेवा महिला टुकड़ी (सेना, वायुसेना, नौसेना) शामिल हुई। 100 महिला कलाकारों ने भारतीय वाद्ययंत्रों पर संगीत बजाया और सभी सांस्कृतिक प्रदर्शन महिलाओं द्वारा हुए। 2025 में भी ‘नारी शक्ति’ पर ही फोकस रहा।  सीआरपीएफ की 148 सदस्यीय ऑल-विमेन कंटिंजेंट (नेतृत्व: असिस्टेंट कमांडेंट ऐश्वर्या जॉय एम) और दिल्ली पुलिस महिला बैंड शामिल हुई। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की झांकी ने महिलाओं की भूमिका हाईलाइट की।

इस बार गणतंत्र दिवस परेड में क्या होगा खास?

गणतंत्र दिवस परेड की यह परेड, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार हो रही है।  यह ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव भी है, जिसमें सांस्कृतिक तत्व प्रमुख रहेंगे। कर्तव्य पथ के किनारे बने घेरों में राष्ट्रीय गीत के शुरुआती छंदों को दर्शाने वाली पुरानी पेंटिंग प्रदर्शित की जाएंगी मुख्य आकर्षण पहली बार का फेज्ड बैटल एरे फॉर्मेट है यानी सेना के हथियार और इकाइयां, युद्ध के वास्तविक क्रम में दिखेंगी। नया भैरव लाइट कमांडो बटालियन भी इस बार डेब्यू करेगा। हवाई फ्लाईपास्ट में राफेल, Su-30, अपाचे, LCH आदि बैटल फॉर्मेशन में होंगे। 30 टेब्लो, 18 मार्चिंग कंटिंजेंट, 13 बैंड, IAF वेटरन्स टेब्लो और माउंटेड कॉलम भी शामिल होंगे।

77वें गणतंत्र दिवस  पर मुख्य अतिथि यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा रहेंगे। यह परेड भारत की सैन्य ताकत, स्वदेशी तकनीक, आधुनिक युद्ध क्षमता और सांस्कृतिक विरासत का शक्तिशाली प्रदर्शन करेगी।

 

CRPF की टुकड़ी कर्तव्यपथ पर कदमताल करते हुए (Photo Credit: timesnowhindi)

सिमरन बाला की इस उपलब्धि से देशभर की महिलाओं में उत्साह है। सिमरन, करोड़ों युवतियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, लगन, मेहनत और आत्मविश्वास से शिखर पर पहुंचा जा सकता है, उन्होंने यह सिद्ध करके दिखाया है। एक महिला अफसर द्वारा पुरुषों की टुकड़ी को लीड करना दिखाता है कि अब यह नया भारत है। यहां महिलाएं केवल भागीदार ही नहीं, बल्कि नेतृत्व भी कर सकती हैं। अवसर मिलने पर हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर सकती हैं। सिमरन बाला का नेतृत्व केवल गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा भर नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत की तस्वीर है। भारत की आन-बान-शान में हमारे बेटों के साथ-साथ बेटियों का भी योगदान है।

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