क्या तोड़ी गई मूर्ति या फैलाया जा रहा है भ्रम? 10 सवालों में जानिए मणिकर्णिका घाट विवाद की पूरी सच्चाई

उत्तर प्रदेश के वाराणसी का मणिकर्णिका घाट इन दिनों सुर्खियों में छाया हुआ है, वजह है वहां सरकार द्वारा किया जा रहा पुनर्विकास परियोजना कार्य। 11 जनवरी, 2026 को मणिकर्णिका घाट पर भारी मशीनरी के जरिए संरचनाओं को हटाने का काम शुरू किया गया, जिसके बाद से सदियों पुराने मंदिरों और मूर्तियों को ध्वस्त किए जाने की खबरें और उससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इन फोटो और तस्वीरों में दावे किए गए कि वहां 100 वर्ष पुरानी महारानी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा तोड़ा गया साथ ही कई अन्य मूर्तियां भी क्षतिग्रस्त हुईं हैं।
मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास के दौरान उठे विवाद के प्रमुख पहलू –
- विवाद का प्रमुख कारण लगभग 100 वर्ष पुरानी महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा और उनसे जुड़ी एक “मणि” (पत्थर का चबूतरा), मंदिर को नुकसान पहुंचने या हटाए जाने का आरोप हैं।
- 13 जनवरी 2026 को स्थानीय निवासियों, पुरोहितों तथा पाल और मराठा समुदायों के सदस्यों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान प्रशासन पर काशी की आध्यात्मिक संस्कृति और विरासत को नष्ट करने का आरोप लगाया गया।
- कई स्थानीय निवासी और पुजारी मानते हैं कि काशी की प्राचीन पहचान उसकी संकरी गलियों और पुरानी संरचनाओं में बसती है, जिसे आधुनिकता के नाम पर बदला जा रहा है।
- होलकर राजपरिवार के वंशजों और खासगी ट्रस्ट ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “शर्मनाक और अपमानजनक” बताया। साथ ही प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर प्रशासन का कहना है कि यह कार्य विरासत को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि मणिकर्णिका घाट के नवनिर्माण और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है कि किसी महत्वपूर्ण मंदिर या मूर्ति को तोड़ा गया है। उनका कहना है कि वायरल पोस्ट में दिखाई दे रहे कुछ पत्थर दरअसल स्थापत्य से जुड़े अवयव हैं, जिन्हें सुरक्षित रखा जा रहा है या स्थानांतरित किया जा रहा है।
इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 17 जनवरी (2026) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन सभी आरोपों को झूठा बताया। साथ ही कहा कि कुछ लोग काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टूटी हुई मूर्तियों की तस्वीरें और AI से बनी फोटो को सोशल मीडिया पर वायरल कर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही ऐसे लोगों पर कड़ी जांच के आदेश भी दिए हैं।
जांच के आदेश – वाराणसी जिला प्रशासन ने आरोपों के बाद (14 जनवरी, 2026) के इस मामले में तोड़ी गई मूर्ति की पहचान करने और हुए नुकसान का आकलन करने के लिए एक आधिकारिक जांच शुरू की गई है।
अधिकारियों ने बताया “भ्रम” – प्रशासन के अधिकारियों ने कहा है कि ये विरोध प्रदर्शन “गलतफहमी” या “बाहरी तत्वों” द्वारा वायरल वीडियो के ज़रिए अफवाहें फैलाने की वजह से शुरू हुए। इसकी जांच जारी है।
मणिकर्णिका घाट: धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
धर्मनगरी काशी मंदिरों का शहर है, इसकी गिनती दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में होती है। इस शहर के 84 घाटों में मणिकर्णिका घाटमणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) का स्थान अतुलनीय है। इस घाट का जिक्र शास्त्रों और पुराणों में मिलता है, जहां हर साल लाखों लोग रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करने आते हैं। पुराणों में भी यहां अंतिम संस्कार का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि इसे महाश्मशान घाट भी कहा जाता है।
“मरणं मंगलं यत्र विभूतिश्च विभूषणम् ,
कौपीनं यत्र कौशेयं सा काशी केन मीयते।”
इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति काशी में मुक्ति पाता है वो जन्म मरण के बंधनों में मुक्त हो जाता है। इस घाट पर 24 घंटे चिताएं जलती रहती हैं, यही कारण है कि इसे महाश्मशान या मोक्षदायिनी घाट भी कहा जाता है। यहां हर दिन लगभग 150 शवों का दाह संस्कार किया जाता है।
इसी मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास और दाह संस्कार से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सरकार परियोजना लाई है। इसके तहत दाह संस्कार मंच, लकड़ी भंडारण / विक्रय क्षेत्र, पूर्व क्रिया स्थल, मुंडन क्षेत्र, शौचालय, पेयजल का विकास किया जाना है। बहरहाल इस विषय को लेकर लोगों मन में कई प्रकार के सवाल उठ रहे हैं, सूचनाओं के अभाव और भ्रामक खबरों के चलते इसे प्रोपेगेंडा बनाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। नीचे इससे जुड़े 10 प्रमुख सवालों के जवाब दिए जा रहे हैं –
सवाल 1 – मणिकर्णिका घाट पर जीर्णोद्धार और पुनर्विकास कैसे हो रहा है?
उत्तर -: बता दें कि मणिकर्णिका घाट के जीर्णोद्धार और पुनर्विकास की योजना की शुरूआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 7 जुलाई, 2023 को आधारशिला रखने के साथ किया गया था। इस कार्य के लिए 17.56 करोड़ का बजट भी दिया गया था। इसमें शवदाह को लिए 18 स्टैंड, लकड़ी स्टोरेज, पंजीकरण और 25 मीटर ऊंची चिमनी का जैसी आधुनिक सुविधाओं को बनाना है। जानकारी के मुताबिक यह परियोजना रूपा फाउंडेशन द्वारा अपनी सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) प्रतिबद्धताओं के तहत वित्तपोषित और क्रियान्वित की जा रही है।
सवाल 2 – मणिकर्णिका घाट पर पुर्नविकास कार्य किस उद्देश्यों से हो रहा है?
उत्तर -: इसका प्रमुख उद्देश्य मणिकर्णिका घाट को शोक मनाने वालों के लिए एक स्वच्छ और अधिक व्यवस्थित स्थान मुहैया कराना है।
शौचालयो की समस्या – वर्तमान में घाट पर आने वालों को पर्याप्त शौचालयों की समस्या का सामना करना पड़ता है।
बाढ़ से घाटों की सुरक्षा – मणिकर्णिका घाट के आसपास घाट पुराने होने के चलते नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी भरने जैसी समस्याओं का सामना पड़ता है। इसका उद्देश्य इन स्थतियों से भी सुरक्षा करना है।
इस पुनर्विकास का उद्देश्य घाट रक इको-फ्रेंडली तकनीक से लकड़ी की खपत व प्रदूषण कम करना, डिजाइन, सीवरेज, जल निकासी, CCTV और प्रकाश व्यवस्था लगाना भी है।
डोम समुदाय की जीवन परिस्थितियों की चुनौतीपूर्ण वास्तविकता को कम करना भी है। जोकि कई पीड़ियों से दाह संस्कार का कार्य करता आया है।
मणिकर्णिका घाट पर हर दिन औसतन 150 शवों का दाह-संस्कार होता है, इससे जुड़ी व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए भी ये पुनर्विकास कार्य होना है।
सवाल 3 – क्या ध्वस्तीकरण के दौरान घाट पर अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति तोड़ा गई?
भ्रामक खबरों के बीच ये फैलाया जा रहा है कि ध्वस्तीकरण के दौरान मणिकर्णिका घाट पर स्थित अहिल्या बाई होल्कर की मूर्ति क्षतिग्रस्त हुई है। मगर ये सच नहीं है। डीएम सतेंद्र कुमार ने बताया कि जो प्रतिमा क्षतिग्रस्त हुई है उन्हें संरक्षित रखा जाएगाऔर घाट के पुन: निर्माण के बाद स्थापित किया जाएगा।
वाराणसी के अपर नगर आयुक्त संगम लाल ने इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि मूर्तियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। उनके मुताबिक ये दीवार में उकेरे गए स्ट्रक्चर थे जिन्हें सुरक्षित नमो घाट रखवाया गया है।

Ahilyabai Holkar Statue
(संस्कृति भवन मंत्रालय में सुरक्षित रखी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति )
बता दें कि रानी अहिल्या बाई होल्कर की मूर्ति को संस्कृति विभाग मंत्रालय में सुरक्षित रखा गया है।
महारानी अहिल्याबाई होलकर का योगदान – महारानी 1780 में वाराणसी के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण किया।
सन् 1791 में अहिल्याबाई होलकर ने मणिकर्णिका घाट का पुनर्निर्माण करवाया था। यह घाट इतना पुराना है कि इसका उल्लेख पांचवी शताब्दी के गुप्त साहित्य मे मिलता है।
अहिल्याबाई ने देशभर में कई प्रसिद्ध तीर्थस्थलों पर मंदिरों, घाटों, कुओं और बावड़ियों का निर्माण कराया था। जिसके चलते उनका नाम हमेशा के लिए अमर हो गया।
सवाल 4 – क्या मणिकर्णिका पर पुनर्विकास प्रोजेक्ट कितने चरणों में पूरा होना है?
Kashi.gov.in के मुताबिक मणिकर्णिका घाट का पुनर्विकास कार्य दो चरणों में पूरा किया जाना है। इस परियोजना के पहले चरण में सड़क के आसपास का नवीनीकरण, प्रवेश द्वार, आगंतुक ब्लॉक, शिव मंदिर का निर्माण, श्मशान संरचना का जीर्णोद्धार शामिल है।
इस परियोजना के दूसरे चरण में श्मशान सुविधाओं का विस्तार, स्नान घाट बनाना, मणिकर्णिका कुंड और विष्णुपादुका स्थल का जीर्णोद्धार, दत्तात्रेय पादुका स्थल का संरक्षण किया जाना है। इसमे मणिकर्णिका गली और अतिरिक्त श्मशान संरचनाओं का निर्माण होना है।
सवाल 5 – मणिकर्णिका घाट पर स्थित मंदिरों का क्या होगा, क्या प्रशासन ने इसके लिए कोई प्लानिंग की है?
मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास कार्य के दौरान सभी पौराणिक मंदिर यथावत रखा जाएगा। इसमें
मसाननाथ मंदिर, महाकाल मंदिर, तर्केश्वर महादेव मंदिर सहित घाट पर स्थित सभी प्राचीन और सक्रिय मंदिरों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। इन्हें न तो तोड़ा जा रहा है और न ही इनके मूल स्वरूप में कोई छेड़छाड़ हो रही है।
सवाल 6 -वर्तमान में किन समस्याओं से जूझ रहा है मणिकर्णिका घाट?
मणिकर्णिका घाट बहुत प्राचीन है, इसका उल्लेख पुराणों में मिलता है। वहीं 4-5वीं शताब्दी के गुप्त शिलालेखों में इसका जिक्र है। बदलते समय में घाट को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। टूरिस्टों की भरमार और सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखन के बीच इसका जीर्णोद्धार जरूरी है।
वर्तमान में मणिकर्णिका घाट, दाह संस्कार, शौचलय की कमी, अत्यधिक भीड़ और दबाव, स्वच्छता और साफ-सफाई पर्यावरणीय चुनौती जैसी कई समस्याओ का सामना कर रहा है।
सवाल 7 -पुनर्विकास कार्यक्रम के बाद कैसे बदल जाएगा मणिकर्णिका घाट का दृश्य? तस्वीरों की मदद से समझें

Manikarnika Ghat
मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास कार्यों से श्मशान घाट पर होने अव्यवस्था से मुक्ति मिलेगी

Manikarnika Ghat Entry Point
ऊपर से कवर श्मशान घाट का दृश्य और नवनिर्माण के बाद अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा घाट हरित शवदानग्रह (ग्रीन क्रमेशन ग्राउंड)

Manikarnika Ghat Whole point
पुनर्विकास के बाद कुछ ऐसा दिखेगा मणिकर्णिका घाट का एंट्री पॉइंट
पुनरुद्धार कार्यों के बाद कुछ ऐसे दिखेंगे मणिकर्णिका के घाटों का नजारा

Manikarnika Ghat Whole Covering Image
ग्राफिक्स आधारित तस्वीरों से समझें नव निर्माण के बाद मणिकर्णिका घाट की तस्वीर

Manikarnika Ghat GFX
चित्र 2 पुनर्विकास के बाद का मणिकर्णिका घाट
1. काशी विश्वनाथ मंदिर
2. मंदिर एवं श्मशान के लिए साझा मार्ग
3. मणिकर्णिका घाट
3.1 अतिथि गृह
3.2 शिव मंदिर
3.3 बाबा मसान नाथ मंदिर
3.4 आवृत श्मशान गृह
4. शवयात्रा हेतु गली / शोभायात्रा मार्ग
5. तारकेश्वर महादेव मंदिर
6. मणिकर्णिका कुंड
7. रत्नेश्वर मंदिर
8. विष्णु पादुका मंदिर
9. दत्तात्रेय पादुका मंदिर

Manikarnika Ghat Grafix

Manikarnika Ghat Grafix 2
1. श्मशान विस्तार
2. लकड़ी विक्रय क्षेत्र
3. प्रतीक्षा कक्ष (वेटिंग हॉल)
4. शौचालय सुविधा
5. पेयजल व्यवस्था
6. दाह संस्कार संरचनाएँ – 8
7. चिमनी – 4
8. दर्शन/अवलोकन दीर्घा (व्यूइंग गैलरी)
9. बैठने की व्यवस्था
10. ड्राई स्टोन क्लैडिंग (सूखी पत्थर की परत)
11. जल आपूर्ति व्यवस्था
12. सीवरेज व्यवस्था
13. जल निकासी व्यवस्था (ड्रेनेज)
14. प्रकाश व्यवस्था
सवाल 8 – कब तक पूरा हो जाएगा मणिकर्णिका घाट का पूरा निर्माण कार्य?
मणिकर्णिका घाट निर्माण कार्य के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की गई है। बता दें कि इसका निर्माण कार्य यहां कार्य पिछले लगभग एक वर्ष (2025) से प्रगति पर है, जिसके लिए जून 2026 तक की समय सीमा तय की गई है। इस कार्यो को रूपा नामक एक फाउंडेशन कर रही है, जिसमें CSR की प्रतिबद्धताएं वित्तपोषित हैं।
सवाल 9 – नवनिर्माण परियोजना के बाद मणिकर्णिका घाट पर होने कौन से लाभ होंगे?
मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास परियोजना के प्रमुख लाभ –
बेहतर होंगी जीवन स्थितियां: मणिकर्णिका घाट पर सदियों से डोम समुदाय शव दाह का कार्य करता आया है। इस परियोजना से वहां की कठिन जीवन परिस्थितियों को सुधारने, बेहतर आवास, शिक्षा और आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: इस नव निर्माण से वाराणसी की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत और दाह संस्कार से जुड़ी पवित्र परंपराओं का संरक्षण सुनिश्चित होगा। साथ ही दुनिया बदलते बनारस की तस्वीर देखेगी।
पुरानी अवसंरचना होंगी सुदृढ़: पुनर्विकास से शोकाकुल लोगों के लिए स्वच्छ और सुव्यवस्थित स्थान, लकड़ी के भंडारण, धुएं के नियंत्रण और मलबा निस्तारण की व्यवस्था सही होगी।
पर्यटकों के अनुभव में सुधार: काशी में पर्यटकों की भरमार रहती है। इसके बाद भीड़ को व्यवस्थित किया जा सकेगा ताकि वहां आने वाले सभी पर्यटकों का अनुभव ठीक हो सके।
सामुदायिक लाभ: डोम समुदाय और आगंतुकों के लिए शौचालय, स्नान क्षेत्र, कचरा प्रबंधन और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
आधुनिकता और परंपरा का समन्वय: यह परियोजना आधुनिक स्थान नियोजन को काशी की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़ती है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित होता है।
सवाल 10 – हमारी प्राचीन सनातन संस्कृति, परंपराओं के विषयों के निर्माण कार्यों मे कौन घोल रहा है जहर ?
मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास कार्यों के लिए हुए ध्वस्तीकरण का कुछ राजनीतिक दल (कांग्रेस और समाजवादी पार्टी) विरोध कर रहे हैं। इसके लिए सोशल मीडिया पर विवाद गलत तरीके से यह चित्रित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि प्रशासन का कहना है कि घाट की सीढ़ियों और मढ़ी पर स्थित मूर्तिकला/मोटिफ और मूर्तियाँ परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान अपनी मूल स्थिति में पुनः स्थापित की जाएँगी। इतिहास गवाह है कि काशी ने विकास को कभी न नहीं किया है, विकास के साथ चलकर उसने अपनी संस्कृति से दुनियाभर से लोगों को अपनी ओर खींचा है।
उल्लेखनीय है कि काशी विश्वनाथ कोरिडॉर का भी शुरूआत में विपक्षी दलों द्वारा विरोध किया गया था, बाद में इसके तैयार हो जाने के बाद न केवल काशी की संस्कृति को नई पहचान मिली बल्कि टूरिस्टों का भी आकर्षण बढ़ा। यहा ये समझना जरूरी है कि मणिकर्णिका घाटा का पुनर्विकास का मुद्दा बिल्कुल भी राजनीतिक नहीं है; यह पूरी तरह से हमारी प्राचीन आध्यात्मिक और सनातन संस्कृति, परंपराओं और पवित्र स्थलों को संरक्षित करने और उन्हें बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया एक कदम है।











