क्या तमिलनाडु में हिंदू मंदिर खतरे में हैं? DMK सरकार द्वारा मंदिर के विरुद्ध की गईं 10 कार्रवाइयों से समझें

तमिलनाडु को “मंदिरों की भूमि” कहा जाता है, यहां का हर एक मंदिर अपनेआप में समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास की कहानी गढ़ता है। मगर वहां की डीएमके सरकार अपने राजनीतिक लाभ और वोट बैंक को खुश करने के ले हिंदू और मंदिर विरोधी रुख अपनाती है। इसके चलते 10 मार्च, 2026 को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली स्थित विनयगर मंदिर को डीएमके के स्थानीय अधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया। इससे हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची और पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। श्रद्धालुओं ने दावा किया कि इस मंदिर का लंबे समय से धार्मिक महत्व रहा है और इसे ध्वस्त किए जाने का विरोध किया है। वहीं प्रशासन ने इसे अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई बताया।
क्या था पूरा मामला?
विनयगर मंदिर से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई थी, यहां लोग हर दिन मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करने के लिए आते थे, साथ ही कई अभिषेक और त्योहार भी मनाए जाते थे। इस मंदिर के ध्वस्त करने का हिंदू मुन्नानी नेल्लाई जिला अधिवक्ता ने विरोध किया और बताया कि अकेले डीएमके के 5 साल के शासनकाल में 300 से ज्यादा हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया है। विनयगर मंदिर का विध्वंश कोई पहला मामला नहीं है, वहां सेल्वमुथु कुमारसामी मंदिर (तिरुप्पुर) से लेकर नागथममन मंदिर, वेद विनयगर मंदिर और चेन्नई के श्री नरसिम्हा अंजनेयर स्वामी मंदिर जैसे कई मंदिरों को तोड़ा गया है। कईयों पर दीप जलाने से लेकर प्रथाओं को जारी रखने तक पर प्रतिबंध लगाया गया है। नीचे ऐसी ही प्रमुख घटनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है-
क्या तमिलनाडु में खतरे में हैं हिंदू मंदिर?
तमिलनाडु की जनसंख्या का 87 प्रतिशत हिंदू हैं। मगर इसके बाद भी वहां सरकार के मनमाने फैसले और समय-समय पर मंदिर संपत्तियों को पहुचाएं गए नुकसान से डीएमके सरकार हिंदुओं के खिलाफ नजर आती है। इसका ताजा उदाहरण मदुरै के तिरुपरनकुद्रम मंदिर में दिखा, जहां श्रद्धालुओं को उन्हीं के मंदिर में दीपदान के लिए अदालत के चक्कर लगाने पड़े। इतना ही नहीं अदालत के फैसले के बाद भी उन्हें दीपदान से रोका गया।
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तमिलनाडु में हिंदू मंदिरों की पूरी व्यवस्था को हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती विभाग देखता है, जोकि सरकार के अंतर्गत आता है। इस विभाग में बड़े पैमाने पर कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार के मामले सामने आए और राजस्व में भारी गिरावट देखने को मिली। इसका सबसे चर्चित मामला 4 जनवरी, 2026 को आया, जब मद्रास हाईकोर्ट ने 3.93 एकड़ जमीन को बहाल कर दिया है, जिसे हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (TN HRCE) विभाग ने साल 1994 में बेच दिया था।
क्या है HRCE एक्ट?
हिंदू रिलीजियस एंडोमेंट एक्ट (Hindu Religious Endowment Act) 1863 स्वतंत्रता से पहले का है, जोकि हिंदू मदिरों, मठों और धर्मार्थ संस्थानों के प्रशासन, संपत्ति और प्रबंधन को नियंत्रित करता है। आजादी से पहले अंग्रेज और प्रभावशाली लोग बड़े पैमाने पर मंदिरों में लूटपाट मचाते थे, जिसे देखते हुए ये कानून लाया गया। वर्तमान में ये कानून तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, और केरल में लागू है। इसके कानून के तहत एक बोर्ड बनाया गया, जो मंदिरों के सभी तरह के कार्य देखता है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) हमेशा से हिंदू रिलीजियस एंड चैरिटी एन्डावमेंट बोर्ड के खिलाफ समय-समय पर अपना विरोध जताता रहा है। कई मौकों पर सरसंघचालक ने हिंदू मंदिरों को सरकारी कब्जों से छुड़ाने की बात कही।
तमिलनाडु में बीजेपी और बाकी हिंदू संगठन भी लंबे समय से इस बोर्ड और इसकी कार्रवाईयों को लेकर विरोध जताते आए हैं। विडंबना यह है कि हिंदुओं के खिलाफ ये राज्य प्रायोजित भेदभाव अन्य धर्मों की अपेक्षा में बिल्कुल अलग है। मुसलमानों और ईसाईयों को बिना सरकारी हस्तक्षेप के अपने धार्मिक स्थलों का प्रबंधन और संचालन करने का अधिकार है। यही स्वतंत्रता सिख, यहूदी, पासरी और अन्य धर्म के अनुयायियों के लिए भी है।
1. तमिलनाडु में 300 साल पुराने मंदिर के जीर्णोंद्धार पर भड़के इस्लामिक कट्टरपंथी, HC के आदेश के बाद भी करते रहे विरोध
12 मार्च, 2026 को तमिलनाडु के मदुरै के पेरैयूर तालुक में 300 साल पुराने विनायगर-करुप्पन्नास्वामी मंदिर के जीर्णोद्धार का इस्लामिक कट्टरपंथियों ने विरोध किया। हाईकोर्ट से मंजूरी और पुलिस सुरक्षा के बावजूद कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग विरोध कर रहे हैं, कोर्ट ने न केवल नवीनीकरण की अनुमति दी बल्कि पुलिस संरक्षण का निर्देश दिया।
2. तिरुप्पुर में सेल्वा मुथुकुमारार मंदिर का विध्वंस किया
7 जनवरी, 2026 को तमिलनाडु में एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार के कार्यकाल में अधिकारियों ने तिरुप्पुर जिले के अविनाशी तालुक के रक्कियापत्ती गांव में सेल्वमुथु कुमारसामी (मुरुगन) मंदिर को ध्वस्त कर दिया। इससे हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था को बड़ी ठेस पहुंची। इसके लिए सरकार ने भारी पुलिस बल तैनात किया। कुछ हिंदू संगठनों ने ढांचा हटाने की कार्रवाई का विरोध किया था।
3. अन्नामलैयार मंदिर में शुल्क दोगुना कर दिया
18 जुलाई, 2025 को तमिल सरकार ने तिरुवनमलाई स्थित अन्नामलैयार (अरुणाचलेश्वर) मंदिर में शुल्क में भारी वृद्धि की घोषणा की। विशेष दर्शन टिकट की कीमत ₹50 से बढ़ाकर ₹100 और अभिषेक शुल्क ₹2,500 से बढ़ाकर ₹5,000 कर दिया गया। शुल्क वृद्धि के साथ-साथ, सरकार ने अगले 20 वर्षों में मंदिर के विकास के लिए ₹200 करोड़ की एक मास्टरप्लान को अंतिम रूप दिया पिछले साल शुरू होना था।
4. 100 साल पुराने ऐतिहासिक वेद विनयगर मंदिर को ध्वस्त किया गया
7 जुलाई, 2026 – डीएमके सरकार ने चेन्नई के मिंट स्ट्रीट पर स्थित सौ साल पुराने हिंदू मंदिर को रातोंरात ध्वस्त कर दिया। इससे वहां के श्रद्धालुओं की आंखें नम हुईं। आलाचकों का कहना है कि मौजूदा समय में 250 से अधिक मंदिरों को ध्वस्त किया गया है, अन्य ढांचों को कोर्ट के ऑर्डर के बाद भी बचाया गया।
5. मदुरावॉयल में आधी सदी पुराना नागथम्मन मंदिर ध्वस्त किया गया
22 अप्रैल, 2024 – चेन्नई के मदुरवॉयल में स्थित लगभग 50 वर्ष पुराने नागथममन मंदिर को निजी संपत्ति पर अतिक्रमण बताकर अधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया। भक्तों ने इस कार्रवाई का विरोध और शोक प्रकट किया। तमिल की एम.के. स्टालिन ने नेतृत्व वाली DMK सरकार के दौरान इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। उस दौरान कई स्थानीय हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए।
6. विल्लुपुरम में मंदिर विध्वंस से डीएमके सरकार पर चयनात्मक कार्रवाई के आरोप लगे
19 अगस्त, 2024 – द्रविड़ मुनेत्र कजगम (डीएमके) सरकार ने विलुप्पुरम जिले में एक हिंदू मंदिर को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का हवाला देते हुए अधिकारियों ने ध्वस्त किया। वहीं अवैध जमीन पर बने चर्च को हटाने की कार्रवाई को विरोधों के बाद लगातार टाला गया। इस दोहरे चरित्र को लेकर हिंदू मुन्नानी सदस्यों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनकर हिंदू संपत्तियों को निशाना बना रही है।
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7. शक्ति विनयगर और कल्याण विनयगर मंदिरों को ध्वस्त किया गया
डीएमके शासन में तमिलनाडु के पोलाची स्थित शक्ति विनयगर मंदिर और मदुरै के कल्याणा विनयगर मंदिर को श्रद्धालुओं और हिंदू मुन्नानी के विरोध के बावजूद ध्वस्त किया गया। पोलाची मंदिर को अमृत भारत योजना के तहत फ्लाईओवर निर्माण के लिए हटाया गया, जिससे स्थानीय श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों में नाराजगी देखी गई। इन विध्वंशों ने श्रद्धालुओं के आक्रोश और बढ़ा दिया।
8. कपलेश्वर मंदिर की सीढ़ियों पर दीपक जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया
12 दिसंबर, 2024 – तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने चेन्नई के कपलेश्वर मंदिर के तालाब की सीढ़ियों पर दीपक जलाने पर प्रतिबंध लगाया। तिरुकार्तिगई उत्सव के दौरान इस प्रतिबंध पर पर्यावरणी कारणों का हवाला दिया गया था। अधिकारियों ने इसके लिए जल प्रदूषण का बहाना बनाया था।
9. श्री नरसिम्हा अंजनेयर स्वामी मंदिर को ध्वस्त कर दिया
10 जनवरी, 2022 – चेन्नई के वरदराजपुरम में स्थित श्री नरसिम्हा अंजनेयर स्वामी मंदिर को डीएमके सरकार ने अड्यार नदी किनारे अवैध निर्माण बताकर ध्वस्त किया। तांबरम प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई का वीडियो वायरल हुआ, जिससे हिंदू समुदाय में आक्रोश फैल गया और डीएमके सरकार की आलोचना तेज हो गई। मंदिर काफी पुराना था और हिंदू आस्था का केंद्र था।
10. तमिलनाडु के मानव संसाधन विभाग ने 3 प्राचीन मंदिरों को ग्रामीणों से लेकर अपने नियंत्रण ने लिया
20 जून, 2019 में तमिलनाडु के मानव संसाधन संवहन विभाग (HR &CE) ने वेल्लालूर गांव के ग्रामीणों के पास से मंदिर को अपने नियंत्रण में लिया। ये तीनों मंदिर काफी प्राचीन थे, जिसकी देखरेख पिछले 500 सालों से ग्रामीण लोग ही कर रहे थे। इस कार्रवाई से भक्तों समेत सभी ग्रामीणों में भारी आक्रोश था। इन मंदिरों के नाम इस प्रकार हैं –
- मंडई करुप्पनसामी मंदिर
- एझैकथा अम्मन मंदिर
- वल्लादिकारार मंदिर
निष्कर्ष
तमिलनाडु में मंदिरों से जुड़े हालिया घटनाक्रमों ने प्रशासनिक निर्णयों, धार्मिक आस्थाओं और राजनीतिक दृष्टिकोण के बीच टकराव को उजागर किया है। केवल एक वोट बैंक और वर्ग विशेष को खुश करने के लिए सरकार की सिलेक्टिव कार्रवाइयां कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने पारदर्शिता, निष्पक्षता और संतुलित नीति की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। वहीं हिंदुओं को लेकर ऐसा लापरवाहीपूर्ण नजरिए पर भी ध्यान दिलाया है। तमिलनाडु की भूमि मंदिरों की भूमि है, मगर वर्तमान की घटनाएं मंदिरों की स्थिति की दयनीय हालत की ओर इशारा करती है। ऐसे में सवाल उठता है कि कब तक हिंदुओं को डीएमके की तुष्टिकरण की राजनीति की भेंट चढ़ाया जाता रहेगा।
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