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विजयालक्ष्मी पंडित जन्मदिन: नेहरू के समय कई पदों पर रहीं, इंदिरा गांधी ने नहीं निपटी, सैयद हुसैन संग किया निकाह!

Editor Ritam HindiEditor Ritam Hindi18 Aug 2025, 10:18 am IST
विजयालक्ष्मी पंडित जन्मदिन:  नेहरू के समय कई पदों पर रहीं, इंदिरा गांधी ने नहीं निपटी, सैयद हुसैन संग किया निकाह!

आजादी के 60 दशकों बाद तक भारतीय राजनीति गांधी-नेहरू परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही. भारत में एकक्षत्र राज करने वाली कांग्रेस पार्टी आज भले के गिने-चुने राज्यों तक सिमट कर रह गई हो, लेकिन पार्टी पर आज भी नेहरू-गांधी परिवार का ही कब्जा है. 1947 में मिली आजादी के बाद नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने. लेकिन तब वह अपने परिवार से इकलौते राजनीति में नहीं थे, उनकी छोटी बहन विजयालक्ष्मी पंडित भी राजनीति में सक्रिय थीं. वह कई बड़े पदों पर रहीं. विजयालक्ष्मी लक्ष्मी पंडित का जन्म 18 अगस्त 1900 को प्रयागराज में हुआ था.

विजयालक्ष्मी पंडित के राजनीतिक जीवन की अगर बात की जाए तो जब तक नेहरू जीवित रहे, तब तक वह कई बड़े पदों पर रहीं. कुछ मुद्दों पर मतभेद के बाद भी पंडित नेहरू उन्हें राजनीतिक पदों पर समायोजित करते रहे. लेकिन नेहरू के निधन के बाद इंदिरा गांधी के सत्ता संभालते ही वह एक तरह से राजनीतिक निर्वासन का शिकार होती चली गईं.

विजयालक्ष्मी पंडित की अपनी भतीजी इंदिरा गांधी से कभी नहीं बनी. उन्होंने मुखर होकर 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का विरोध किया. 1977 में जनता पार्टी का खुलकर समर्थन करते हुए रायबरेली से इंदिरा गांधी को हराने में बड़ी भूमिका निभाई.

कैसा रहा विजया लक्ष्मी पंडित का राजनीतिक जीवन?

विजया लक्ष्मी पंडित के राजनीतिक जीवन की अगर बात की जाए, तो वह कई बड़े पदों पर रहीं. ब्रिटिश अधीन भारत से लेकर स्वाधीन भारत तक उन्होंने पद हासिल किए.

1934 में इलाहाबाद म्युनिसिपल बोर्ड के लिए चुनी गईं. संयुक्त प्रांत ( उत्तर प्रदेश) की विधानसभा के लिए 1936 में चुनी गईं. 1937 में स्थानीय स्वशासन और सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कैबिनेट मंत्री बनने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. 1946 में भारत की संविधान सभा के लिए चुनी गईं. 1946-48, 1952-53 और 1963 में संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की नेता थीं. 1947-49 में सोवियत संघ में भारत की पहली राजदूत थीं. 1949-52 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में राजदूत के रूप में कार्य किया. साथ ही 1949 से 1951 तक मैक्सिको की भी राजदूत के तौर पर कार्य किया. 1953-54 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष के रूप में सेवा करने वाली पहली महिला और पहली एशियाई थीं. 1954-61 यूनाइटेड किंगडम में भारतीय उच्चायुक्त (राजदूत) के रूप में कार्य किया. 1962-63 महाराष्ट्र राज्य के राज्यपाल के रूप में कार्य किया.

विजया लक्ष्मी पंडित के भतीजी इंदिरा गांधी से कैसे थे संबंध?

27 मई, 1964 को जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु हो गई. उनकी मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी ने राजनीति में कदम रखा. लेकिन विजया लक्ष्मी पंडित और उनकी भतीजी इंदिरा गांधी के संबंध ठीक नहीं रहे. नेहरू के निधन के बाद विजयालक्ष्मी पंडित ने उनकी परंपरागत लोकसभा सीट फूलफुर से उप चुनाल लड़ा और जीत दर्ज की. उपचुनाव के बाद 1967 में एक बार वह फिर से फूलपुर सीट से ही लोकसभा पहुंचीं. हालांकि 1969 में उन्होंने उन्होंने अपनी लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया.

राजनीति से संन्यास लेकर वह देहरादून में रहने लगीं. लेकिन इस दौरान उनके संबंध इंदिरा गांधी से ठीक नहीं थे. जून 1975 में जब इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल घोषित किया, तब वह इंग्लैंड में थीं. आपातकाल की घोषणा के बाद वह तुरंत घर लौट आईं.

देश लौटकर उन्हें जानकारी मिली की उनके कई दोस्तों को जेल में डाल दिया गया है. वह अपने घर में थीं, लेकिन महौल बिल्कुल आजादी से पहले वाला था. उसके फोन टैप किए जा रहे हैं, पत्रों को सेंसर किया जा रहा है, साथ ही उसकी हरकतों पर लगातार नजर रखी जा रही थी.

राजनीतिक हालात ब्रिटिश शासनकाल की तुलना में अधिक खराब थे, इसे देखते हुए विजय लक्ष्मी पंडित ने अपनी भतीजी इंदिरा गांधी का विरोध करना प्रारंभ कर दिया. यह जानते हुए भी उन्हें इसकी कीमत जेल जाकर चुकानी पड़ेगी. आपातकाल के 2 सालों तक वह लगातार इंदिरा गांधी के खिलाफ मुखर रहीं.

18 जनवरी, 1977 को अचानक आपातकाल हटा लिया गया. विजय लक्ष्मी पंडित ने निश्चय किया कि चुनाव में भतीजी को हराया जाना चाहिए. विपक्षी दलों ने मिलकर जनता दल बनाया. जल्द ही आम चुनाव का आह्वान किया गया. इस चुनाव में विपक्ष को भारी समर्थन मिला. कांग्रेस पार्टी को जबरदस्त नुकसान झेलना पड़ा. इंदिरा गांधी स्वयं रायबरेली से चुनाव हार गईं. उनको हराने में बुआ विजया लक्ष्मी पंडित की बड़ी भूमिका रही.

उन्होंने 1977 में कांग्रेस के प्रत्याशी नीलम संजीव रेड्डी के खिलाफ राष्ट्रपति पद का चुनाव में भी लड़ा. हालांकि इस चुनाव में वह सफल नहीं हो पाईं, लेकिन उनके चुनाव लड़ने के फैसले से इंदिरा गांधी के साथ जारी उनके मतभेद खुलकर सामने आ गए. राष्ट्रपति पद का चुनाव हारने के बाद विजया लक्ष्मी पंडित ने एक बार फिर से राजनीति से दूरी बना ली और वह देहरादून में रह कर लेखन कार्य में व्यस्त हो गईं. 1 दिसंबर 1990 में उनका निधन हो गया.

विजय लक्ष्मी पंडित और सैयद हुसैन के बीच प्रेम प्रसंग

विजया लक्ष्मी पंडित और सैयद हुसैन का प्रेम प्रसंग की इतिहास में दर्ज है. दोनों के बीच प्रेम कहानी की शुरुआत 1919 में हुई थी. मोतीलाल नेहरू ने सैयद हुसैन को इलाहाबाद (प्रयागराज) से प्रकाशित ‘इंडिपेंडेंट’ अखबार का संपादक नियुक्त किया था. तब 30 वर्षीय सैयद हुसैन की मुलाकात आनंद भवन में स्वरूप नेहरू (बाद में विजयलक्ष्मी पंडित) से हुई थी. विजयलक्ष्मी पंडित उनसे करीब 12 साल छोटी थीं. लेकिन इसके बाद भी सैयद हुसैन और विजयलक्ष्मी पंडित का प्रेम प्रसंग चलता रहा. दोनों ने परिजनों से छिपकर निकाह भी कर लिया था.

‘The Daily Star’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, निकाह सैयद हुसैन के कटरा स्थित बंगले में हुआ था. कांग्रेस नेता मौलाना रशीद फाखरी ने निकाह पढ़ा था. विजयलक्ष्मी ने कलमा पढ़कर सैयद हुसैन से निकाह कर लिया था. निकाह के गवाह के तौर पर नवाब मोहम्मद यूसुफ और सैयद असगर हुसैन और प्रसिद्ध पत्रकार एचएम अब्बासी भी शामिल थे.

निकाह के बाद गांधी, मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू काफी नाखुश थे. शुभा चौधरी ने ‘A Forgotten Ambassador in Cairo’ पुस्तक के हवाले से लिखा है कि यह नाराज़गी उम्र के अंतर के कारण नहीं, बल्कि धार्मिक मतभेद की वजह से थी. गांधी और नेहरू परिवार ने दोनों को तलाक के लिए राज़ी कर लिया था.

विजयलक्ष्मी पंडित ने अपनी आत्मकथा The Scope of Happiness में अपने प्रेम संबंध को लेकर उल्लेख किया है. उन्होंने लिखा कि उस समय वे यह सोचती थीं कि हिन्दू-मुस्लिम एकता के माहौल में धर्म के बाहर विवाह करना स्वाभाविक था. हालांकि, बाद में उन्हें साबरमती आश्रम भेजा गया.

तलाक के बाद विजयलक्ष्मी ने 1921 में गुजराती ब्राह्मण रंजीत सीताराम पंडित से विवाह किया था. विजया लक्ष्मी पंडित की विवाह सन् 1921 में गुजराती ब्राह्मण रंजीत सीताराम पंडित के साथ हुआ था. विजया लक्ष्मी पंडित के बचपन का नाम स्वरूप नेहरू था, लेकिन रंजीत सीताराम पंडित से शादी करने के बाद, उन्होंने अपना नाम विजया लक्ष्मी पंडित रख लिया था. विजया लक्ष्मी पंडित की पुत्रियों का नाम 1- नयनतारा सहगल, 2-चंद्रलेखा है.