Explained: बजता रहा ईरानी राष्ट्रगान मगर मौन रहे खिलाड़ी…जानें कब-कब मजहब की आड़ में महिला अधिकारों पर लगाए गए प्रतिबंध

ईरान और इजरायल, अमेरिका में चल रहे तनाव और संघर्ष के बीच मध्य पूर्व में भूराजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं। इस बीच महिला सुरक्षा और अधिकारों का मुद्दा एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। 3 मार्च, 2026 को एएफसी महिला एशियाई कप 2026 में दक्षिणी कोरिया के खिलाफ अपने पहले फुटबॉल मैच में ईरानी महिला टीम का राष्ट्रगान बजा तो एक हैरान करने वाला दृश्य सामने आया। दरअसल, ईरानी महिला फुटबॉल टीम मौन खड़ी रही। राजनीतिक स्थिति के विरोध में न तो किसी खिलाड़ी और न ही मुख्य कोच ने राष्ट्र गान गाया।
महिलाओं का यह विरोध एक बार फिर ईरान में महिलाओं की दयनीय स्थिति और उन पर लगाए गए प्रतिबंधों की तरफ ध्यान दिलाता है। ईरान की शरिया आधारित दोहरी न्यायिक प्रणाली महिला और पुरुषों के बीच भेदवाव की एक गहरी खाई बनाती है। जहां सदियों से सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में महिलाओं को दबाया गया है। वास्तव में ईरान में महिलाओं के लिए बनाए गए कानून किसी पिंजरे से कम नहीं है। महिलाओं को स्टेडियमों में प्रवेश से रोक, विज्ञापनों में भाग लेने से प्रतिबंधित किया जाना, मोटरबाइक चलाने पर प्रतिबंध और सार्वजनिक रूप से गाने से रोक इसके कुछ उदाहरण हैं।
ईरान में महिलाओं को कंट्रोल करने वाले कानूनों का केंद्र क्या है?
ईरान में महिलाओं की जिंदगी नर्क बनाने वाले कानूनों का केंद्र शरिया है। दरअसल, ईरान की कानूनी व्यवस्था इस्लामी शरिया कानून पर आधारित है, इसका सीधा सा मतलब है कि वहां के कानून मजहब की आड़ में बनाए जाते हैं। यही व्यवस्था लिंग के आधार पर जिम्मेदारी, पारिवारिक और निजी कानून मुख्य रूप से महिलाओं के लिए सख्त ड्रेस कोड और मानवाधिकार से जुड़े नियमों को कंट्रोल करती है।
ईरान में महिलाओं पर कितने तरह केल प्रतिबंध लगाए गए हैं?
ईरान में महिलाओं पर जबरन कई प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए हैं। ये न केवल उनकी भागीदारी को घटाकर घर की चार दिवारी तक सीमित करते हैं, बल्कि उनके अस्तित्व पर भी कई सवाल खड़े करते हैं।
9 की उम्र में शादी – ईरान में लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम आयु 18 साल नही हैं बल्कि वहां उम्र को जैविक यौवन (Puberty) से जोड़ा गया है। कानून के हिसाब से 9 चांद साल (9 वर्ष) लड़की को निकाह के योग्य माना गया हैस, जोकि काफी गंभीर भी है। अगर माता-पिता और जज सहमति दें तो तय मानक से कम आयु में भी शादी की जा सकती है।
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हिजाब नहीं तो जेल व कोड़े – वहां केवल 7 साल की बच्ची को भी सिर ढकना पड़ता है। अगर वो ऐसा नहीं करतीं या हिजाब गलती से खिसक जाता है तो 2024 के नए नियमों के अनुसार 10-15 साल की जेल और सबके सामने कोड़े मारे जाते हैं।
शादी और तलाक और बच्चों में महिलाओं को अधिकार नहीं – ईरान में महिलाओं के लिए तलाक देना असंभव है। ये केवल पति ही दे सकता है। वहीं पुरुषों को 4 पत्नियां रखने का अधिकार है, जबकि महिलाएं केवल एक ही शादी कर सकती हैं। महिला केवल बच्चों को 7 साल तक ही अपने पास रख सकती है, इसके बाद वो पिता का हो जाता है। दूसरी शादी करने पर मां पहले बच्चों से नहीं मिल सकती।
महिलाओं की गवाही की कीमत आधी – कोर्ट में महिला की गवाही की कीमत पुरुषों की तुलना में आधी मानी जाती है। यानी अपराध को सत्य साबित करने के लिए 1 पुरुष = 2 महिला माना जाता है। इतना ही नहीं पिता का संपत्ति में भी बेटे के मुकाबले बेटी को आधा हिस्सा ही मिलता है।
पति की परमीशन के बिना नो पासपोर्ट – ईरान में शादीशुदा महिला पति की इच्छा के विरुद्ध देश नहीं छोड़ सकती। उसे पासपोर्ट बनाने के लिए पति के रिटन कंसेंट लैटर की जरूरत होती है।
ब्लड मनी या खून का गुजारा भत्ता – ईरान में महिला की जान की कीमत पुरुष से कम है, इसका उदाहरण है ब्लड मनी कानून। अगर किसी स्त्री की हत्या होती है तो अपराधी उसके परिवार को गुजारा भत्ता देकर छूट सकता है। ये मुहावजा पुरुष की तुलना में आधा होता है।
नौकरी और स्टेडियम में भी शर्तों के साथ अनुमति – ईरान में पति अपनी पत्नी को नौकरी करने से रोक सकता है। साथ ही लंबे समय तक महिलाएं स्टेडियम में जाकर पुरुषों का फुटबॉल मैच भी नहीं देख सकतीं। अब इसे शर्तों के साथ खोला गया है।
ईरान के इतिहास में ऐसी अनगिनत घटनाएं है, जहां महिलाओं को आधिकारों को ताक पर रखकर मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया है। नीचे साल 2022 से 2026 के बीच घटी ऐसी ही 10 घटनाओं के बारे में डिटेल में बताने जा रही है, जहां महिला की अस्मिता को छला गया।
1. ईरान ने दहेज कानून में बदलाव करके महिलाओं के अधिकारों पर लगाया अंकुश
ईरान की सरकार ने पुरुषों के लिए अपनी नीतियों को उदार करते हुए दिसंबर 2025 में कारावास से बचने के लिए पति द्वारा पत्नी को भुगतान की जाने वाली दहेज राशि की सीमा को कम (पहले -110 , अब केवल – 14 सिक्के) कर दिया है। ये नियम महिलाओं की आर्थिक व्यवस्था को कमजोर करने के साथ उनके प्रति किए जाने वाले भेदभावों को मजबूत करता है।
बता दें कि महिलाओं के लिए संपत्ति को लेकर भी कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, पति की मृत्यु के बाद पत्नी को अचल संपत्तियों का केवल आठवां (1/8) हिस्सा मिलता है।
2. विश्व कप क्वालीफायर मैच के लिए ईरानी महिलाओं को स्टेडियम में प्रवेश करने से रोका गया
31 मार्च, 2022 में ईरानी अधिकारियों ने दर्जनों महिलाओं को मशहद के इमाम रजा स्टेडियम में ईरान-लेबनान फीफा विश्व कप 2022 क्वालीफाइंग मैच देखने के लिए प्रवेश करने से रोक दिया। हालांकि उनमें से कई ने टिकट खरीद लिए थे।
स्टेडियम में प्रवेश से वंचित किए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाओं को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने काली मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया। मानवाधिकार समूहों ने कहा कि यह घटना खेल आयोजनों में महिलाओं की उपस्थिति पर ईरान के लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंधों को दर्शाती है।
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3. ईरानी महिलाएं प्रतिबंधों के विरोधों में मोटरबाइक का प्रयोग कर रही हैं
13 नवंबर, 2025 को ईरान की राजधानी तेहरान में कई महिलाओं ने लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंधों के बावजूद मोटरसाइकिल चलाना शुरू कर दिया है। अधिकारियों द्वारा महिलाओं को मोटरसाइकिल लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाई गई थी। रूढ़िवादी धर्मगुरुओं और अधिकारियों का तर्क है कि मोटरसाइकिल चलाना मर्यादा के नियमों का उल्लंघन करता है और महिलाओं को उचित हिजाब धारण करने से रोकता है।
इस बीच नियमों के उल्लंघन में सामाजिक चेतावनी और पुलिस की कार्रवाईयों का खतरा बना रहता है।
4. ईरान के भेदभावपूर्ण कानून करते हैं महिलाओं के माता-पिता के अधिकारों का उल्लंघन
23 अप्रैल, 2025 को ईरानी पारिवारिक कानून के अनुसार बच्चों पर पिता का पूर्ण कानूनी अधिकार होता है। मां को संरक्षकता तभी मिल सकती है जब पिता की मृत्यु हो जाए और दादा को कोई आपत्ति न हो।
तलाक की स्थिति में आमतौर पर मां को सिर्फ सात साल की उम्र तक ही बच्चे का संसरक्षण मिलता है, उसके बाद संरक्षण पिता को सौंप दिया जाता है। तलाक के बाद भी बच्चे से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले पिता या दादा ही लेते हैं। वहीं, पुनर्विवाह करने पर मां स्वतः ही बच्चे का संरक्षण खो देती है।
5. ईरान ने महिला गायिकाओं के खिलाफ खोला मोर्चा
इस्लाम में संगीत को हराम बताया गया है, मगर ईरान ने इसे केवल महिलाओ के लिए एकतरफा कार्रवाई के रूप में लागू किया। 17 मार्च, 2025 को ईरानी अधिकारियों ने ऑनलाइन पोस्ट करके सार्वजनिक रूप से गाने वाली महिला सिंगर्स के खिलाफ कार्रवाई तेज की।
इस दौरान कई महिला गायिकाओं को हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ करके सोशल मीडिया अकॉउंट्स को बंद कर दिया गया। गायिका बीटा हाजिसदेघियन से “सार्वजनिक शालीनता भंग करने” के आरोप में पूछताछ की गई, जबकि हिवा सैफजादेह जैसी अन्य गायिकाओं को प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया।
6. ईरान में लैंगिक भेदभाव महिलाओं के वर्तमान और भविष्य को कुचल रहा है
6 मार्च, 2025 को ईरान में मानवाधिकार केंद्र की एक रिपोर्ट में बताया गया कि ईरानी कानून और नीतियां महिलाओं का हर तरीके से उत्पीड़न करती हैं। इसमें अनिवार्य हिजाब लागू करना, पुरुष संरक्षकता, यात्रा और कार्य पर प्रतिबंध, भेदभावपूर्ण विवाह शामिल हैं। रिपोर्ट में इसे स्पष्ट शब्दों में लैंगिक भेदभाव कहा गया और मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में मान्यता देने के लिए कहा।
7. ईरान के नए नियमों में हिजाब कानूनों के प्रतिबंधों को और सख्त किया गया
14 अक्टूबर, 2024 को ईरान ने “हिजाब और पवित्रता की संस्कृति को बढ़ावा देकर परिवार की सुरक्षा” कानून को मंजूरी दी। इसमें इस अनिवार्य पहनावे के नियमों को और भी सख्त किया गया। इस कानून का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना, यात्रा प्रतिबंध, कारावास, ऑनलाइन गतिविधियों पर रोक शामिल है। साथ ही इसमें 10 साल तक की सजा का भी प्रावधान है।
ये कानून ईरानी सुरक्षा बलों को अतिरिक्त शक्ति देता है। साथ ही अनुचित पहनावे को बढ़ावा देने के विरोध में वहां के प्रशासन की तरफ से स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर नियमों को कठोर किया गया है।
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8. UN के अनुसार ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को कुचलने के लिए मानवता के खिलाफ अपराध हुए है
साल 2022 में महसा अमिनी की मृत्यु के बाद भड़के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरान ने हिंसा का सहारा लिया। इसमें हत्या, यातना, बलात्कार, मनमानी हिरासत और उत्पीड़न सहित अधिक बल प्रयोग किया गया। संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय तथ्य जांच मिशन ने निष्कर्ष निकाला कि ये कार्रवाईयां, खासतौर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और महिलाओं को निशाना बनाया गया। ये मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आती हैं।
9. ईरानी कानून पुरुषों की अनुमति के बिना महिलाओं की विदेश यात्रा पर रोक लगाता है
अगस्त 2023 में ईरानी पोस्पोर्ट कानून बनाया, जिसके तहत विवाहित महिलाओं के पासपोर्ट बनाने के लिए पति की अनुमति को अनिवार्य कर दिया गया। इसके लिए पति के रिटन कंसेंट की जरूरत पड़ेगी और अगर वो चाहे तो इसे रद्द भी कर सकता है।
10. ईरान में महिला न्यायधीश नहीं सुना सकती अदालतों के फैसले, सरकार ने किया बैन
10 जून, 2023 में ईरान में बने कानून के तहत वहां महिलाओं को न्यायाधीश के रूप में अंतिम अदालती फैसला सुनाने या उस पर हस्ताक्षर करने की अनुमति नहीं है। वे न्यायपालिका में केवल सलाहकार, शोधकर्ता या जांचकर्ता जैसी सीमित भूमिकाओं तक ही सीमित रहती हैं, जबकि आधिकारिक निर्णय देने का अधिकार पुरुष न्यायाधीशों के पास ही होता है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह नियम ईरान की न्यायिक व्यवस्था में मौजूद उस संस्थागत भेदभाव को दर्शाता है, जो महिलाओं की भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता को सीमित करता है।
ऐसे सभी मामले चिल्ला-चिल्ला कर बता रहे हैं कि ईरान में महिलाओं की स्थिति काफी गंभीर है। इससे पता चलता है कि न केवल ईरान के कानून एकतरफा हैं, बल्कि वो महिलाओं के प्रति हिंसा और भेदभाव को बढ़ाने वाले भी हैं। शरिया आधारित व्यवस्था के तहत कई क्षेत्रों में महिलाओं पर कठोर प्रतिबंध लगाए गए हैं। उनके प्रति क्रूरता, हिंसा, सख्ती के बावजूद ईरानी महिलाएं खेल, सामाजिक आंदोलनों और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से अपने अधिकारों की आवाज उठा रही हैं।
ईरान में महिलाओं की स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चिंता का विषय है, ये मानवाधिकारों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। ये सभी मामले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के लिए आवाज उठाने के महत्व को बताते हैं, ताकि एक मजहब विशेष की दमनकारी नीतियों से उन्हें बचाया जा सके।
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