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ईरानी सरकार के खिलाफ महिला एथलीटों की साहसी लड़ाई…जानें मैदान से कब-कब उठी महिला अधिकारों की आवाज

Editor Ritam HindiEditor Ritam Hindi17 Mar 2026, 09:56 am IST
ईरानी सरकार के खिलाफ महिला एथलीटों की साहसी लड़ाई…जानें मैदान से कब-कब उठी महिला अधिकारों की आवाज
ईरानी सरकार का इन महिला एथलीटों ने किया विरोध, इसके बारे में डिटेल में बता रहे हैं।

एएफसी 2026 महिला एशियाई कप में दक्षिण कोरिया और ईरान के मुकाबले से पहले राष्ट्रगान के दौरान सफेद यूनिफॉर्म और हेड स्कार्फ पहनी ईरानी महिला फुटबॉल टीम ने मौन खड़े होकर विरोध दर्ज कराया। इस घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा और महिला अधिकारों पर ध्यान दिलाया। इसका नतीजा यह हुआ कि इरान की सरकारी मीडिया ने उन्हें “युद्धकालीन गद्दार” घोषित किया और कठोर सजा की मांग की। इसने महिला खिलाड़ियो की सुरक्षा और घर लौटने को लेकर आशंकाएं पैदा कीं।

महिला सुरक्षा और अधिकारों को देखते हुए 10 मार्च, 2026 को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मानवीय आधार पर 6 ईरानी महिला खिलाड़ी के लिए वीजा को मंजूरी दी। वहीं बाकी वापस लौट गईं। दशकों से दुनिया ने ईरान में धर्म के नाम पर होने वाले अपराधों पर ज्यादातर समय तक चुप्पी साधे रखी। यहां तक कि हाल ही किए गए इस प्रतिकात्मक विरोध प्रदर्शन को भी नारीवादी और उदारवादी समूहों ने न के बराबर समर्थन दिया।

ईरानी सरकार ने धर्म विशेष की आड़ में महिलाओं पर सख्त और क्रूर प्रतिबंध लगाए गए। इनके बावजूद भी ईरानी महिला एथलीटों ने उल्लेखनीय कौशन और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन करते हुए भिन्न अंतर्राष्ट्रीय खेलों में शीर्ष स्थान पाएं हैं। उन्होंने न केवल खुद को मजबूत बनाया बल्कि मौका मिलने पर सरकार के दमन और भयावहता को उजागर किया।

1979 की इस्लामी गणराज्य की स्थापना के बाद कैसे बदला महिलाओं का जीवन और अधिकार?

70 के दशक का ईरान आज की तुलना में काफी बदला हुआ था, वहां पश्चिमी सभ्यता का काफी बोलबाला था। ईरान में 1936 में पहलवी वंश के रजा शाह ने हिजाब और बुर्का पर बैन लगा दिया था। मगर 1979 में जब इस्लामी क्रांति हुई तो महिलाओं के अधिकार आश्चर्यजनक रूप से प्रभावित हुए। उदाहरण के लिए 13 वर्ष की आयु से ही बाल विवाह की अनुमति, तलाक का एकतरफा सीमित अधिकार आदि।

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किस घटना ने ईरान में महिलाओं के अधिकारों और राज्य द्वारा किए जा रहे दमन पर ध्यान और भी तीव्र कर दिया?

ईरान में महिला अधिकारों की मांग हमेशा से ही उठती रही हैं मगर साल 2022 में महसा अमिनी (एक 22 वर्षीय कुर्द-ईरानी महिला) ने इसमें क्रांति ला दी। 13 सितंबर, 2022 को तेहरान में ईरान की नैतिकता पुलिस ने महसा अमिनी को गिरफ्तार कर लिया गया। हिरासत में उनकी हालात इतनी खराब हो गई कि 16 सितंबर, 2022 को अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के तुरंत बाद पूरे ईरान में “महिला, जीवन, स्वतंत्रता” के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। ये साल 2009 के बाद होने वाले सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन थे।

ईरान मानवाधिकार संगठन ने दिसंबर 2022 तक सुरक्षा बलों के हमलों में कम से कम 476 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की। वहीं संयुक्त राष्ट्र के तथ्य जांच मिशन ने 2023 तक कार्रवाई में 500 से अधिक लोगों के मारे जाने  और 22,000 से अधिक के हिरासत में लेने की पुष्टि की थी।

इस दौरान कुछ महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से हिजाब जला दिए और ईरान के शहरों में पुरुषों और महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किए। ये आधुनिक ईरानी इतिहास में पहली बार था जब बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन मुख्य रुप से महिलाओं के अधिकारों पर केंद्रित थे। इसी का परिणाम था कि कुछ महिलाएं अब वहां हिजाब का बहिष्कार कर चुकी हैं।

कैसे और कब-कब ईरानी महिला खिलाड़ियों ने शासन के खिलाफ लड़ी है लड़ाई?

नीचे कुछ घटनाओं की मदद से बताने जा रहे हैं, जब ईरानी महिला खिलाड़ियों ने शासन के खिलाफ लड़ाई करके अपना प्रदर्शन किया।

29 अगस्त, 2023 ईरानी महिला मुए थाई टीम ने अनिवार्य हिजाब का उल्लंघन किया

ताशकेंट में आयोजित एशियाई मुआय थाई चैंपियनशिप के दौरान ईरान की महिला टीम की कई खिलाड़ियों ने अनिवार्य हिजाब पहने बिना मुकाबला किया। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में इसे ईरान के ड्रेस कोड का उल्लंघन माना जाता है।

खिलाड़ियों का यह फैसला ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच लिया गया, जिसे नागरिक अवज्ञा के साहसिक कदम के रूप में देखा गया। वहीं ईरानी अधिकारियों और खेल प्राधिकरणों ने इस पर नाराजगी जताते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी।

ईरानी शतरंज स्टार सारा खादेम ने विरोध में बिना हिजाब के प्रतिस्पर्धा की

 

ईरानी स्टार शतरंज स्टार सारा खादेम (सोर्स – Edition CNN)

ईरान की शतरंज खिलाड़ी सारा खादेम ने 26 दिसंबर 2022 को कजाखस्तान के अल्माटी में आयोजित FIDE World Rapid and Blitz Championship में बिना हिजाब के खेलकर बड़ा संदेश दिया। उनका यह कदम महसा अमिनी की मौत के बाद ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के समर्थन के रूप में देखा गया।

उस समय 24 वर्षीय इंटरनेशनल मास्टर ईरान की शीर्ष महिला (रेटिंग 2482)  खिलाड़ी थीं। ईरानी शतरंज महासंघ ने उनके कदम की आलोचना की। गिरफ्तारी की आशंका के कारण वह जनवरी 2023 में अपने पति और बेटी के साथ स्पेन चली गईं। जुलाई 2023 में उन्हें स्पेन की नागरिकता मिली और वर्तमान में वह स्पेन का प्रतिनिधित्व करती हैं।

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ईरानी पर्वतारोही एल्नाज रेकाबी बिना हिजाब के प्रतिस्पर्धा करती हैं

ईरानी पर्वतारोही एल्नाज रेकाबी ने अक्टूबर में Asian Climbing Championships 2022 (सियोल) में बिना हिजाब के हिस्सा लिया। यह घटना इसलिए चर्चा में आई क्योंकि इसे महसा अमिनी की मौत के बाद ईरान में चल रहे महिला अधिकारों के विरोध प्रदर्शनों के प्रति मौन समर्थन माना गया।

रेकाबी ने बोल्डरिंग फाइनल में बिना हिजाब के प्रदर्शन किया और 18 अक्टूबर 2022 को ईरान लौटीं। बाद में इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने कहा कि हिजाब “गलती से” नहीं पहन पाईं। रिपोर्टों के मुताबिक अधिकारियों ने उनका पासपोर्ट अस्थायी रूप से जब्त किया और स्पष्टीकरण देने का दबाव डाला। बाद में प्रतिबंधों के बाद उन्होंने ईरान छोड़कर विदेश में रहने का फैसला किया।

हिजाब पहनने से इनकार किया, बलात्कार और एसिड हमले की धमकियों का सामना करना पड़ा

2022 में ईरानी अंतर्राषट्रीय फुटबॉल रेफरी महसा घोरबानी को कई सालों तक दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा। बाद में उन्होंने देश छोड़कर स्वीडन में शरण ली। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की और फोन जब्त कर लिया। उन पर दबाव डाला गया कि वो साइन करें कि वो मानसिक रूप से अयोग्य हैं। बता दें कि घोरबानी ने हिजाब पहनने से भी मना कर दिया था, जिसके चलते उन्हें कट्टरपंथियों के विरोध का सामना करना पड़ा।

परमिडा बिना हिजाब के मंच पर खड़ी हुईं, जिससे ईरानी महिलाओं के अधिकारों के लिए एक साहसिक संदेश गया

 

तेहरान तीरंदाजी समारोह 2022 का चित्र, (सोर्स – Edition.cnn)

10 नवंबर, 2022 को तेहरान में एक तीरंदाजी पुरस्कार समारोह के दौरान, ईरानी तीरंदाज परमदा गसेमी को मंच पर सिर से हिजाब गिराते रिकॉर्ड किया गया। इसे महसा अमिनी की मौत के बाद सरकार के विरोध और महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में देखा गया। जब एक साथी खिलाड़ी ने उनका हिजाब ठीक करने की कोशिश की, तो उनके हटने पर दर्शकों ने तालियां बजाईं।

निलोफर ​​मरदानी- ईरानी स्पीड स्केटर ने अनिवार्य हिजाब का उल्लंघन किया

7 नवंबर, 2022 को ईरान की राष्ट्रीय स्केटिंग टीम में लंबे समय तक रहने वाली निलोफर मरदानी ने एक मैराथन स्केटिंग प्रतियोगिता में बिना अनिवार्य हिजाब पहले हिस्सा लिया। साथ ही वो विजेता भी रहीं और विजेता भी रहीं। उनके इस साहसी कदम को ईरानी सरकार के दमन और वहां होने वाले महिलाओं के साथ व्यापक दुर्व्यवहार के खिलाफ प्रतिकात्मक विरोध के रूप में देखा गया।

राजनीतिक दबाव और हिजाब प्रतिबंधों के कारण ईरानी ताइक्वांडो चैंपियन ने टीम बदल ली

ओलंपिक पदक विजेता कीमिया अलीजादेह ( सोर्स – NPR.org)

जनवरी, 2020 में ईरानी ओलंपिक कांस्य पदक विजेता किमिया अलीजादेह ने घोषणा की कि उन्होंने ईरान को स्थायी रूप से छोड़ दिया। उन्होंने अधिकारियों पर खिलाड़ियों को प्रचार के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। एक बयान में उन्होंने लिखा: “मैं ईरान में लाखों उत्पीड़ित महिलाओं में से एक हूँ… उन्होंने जो भी कहा, मैंने वही पहना… हम महज़ एक उपकरण हैं।”

2016 रियो ओलंपिक में ईरान के लिए अलीजादेह ने ओलंपिक पदक जीता था, वो ओलंपिक पदक पाने वाली पहली ईरानी महिला भी बनीं। 2023 में, उन्हें बुल्गारिया की नागरिकता प्राप्त हुई।

ईरानी शतरंज निर्णायक ने अनिवार्य हिजाब का उल्लंघन किया, महिला अधिकारों का वैश्विक प्रतीक बनीं

Shohreh Bayat – (Source – Chess for Student)

शोहरे बायात (जन्म 1987) ईरान की पहली महिला ग्रेड-ए अंतरराष्ट्रीय शतरंज रेफरी में से एक हैं। उन्होंने 2020 में शंघाई में आयोजित महिला विश्व शतरंज चैंपियनशिप में मुख्य रेफरी की भूमिका निभाई। प्रतियोगिता के दौरान उनका ढीला हिजाब पहने एक फोटो सामने आया, जिसके बाद ईरानी सरकारी मीडिया और शतरंज महासंघ ने उनसे माफी मांगने और तस्वीर बदलने को कहा।

बायात ने माफी मांगने से इनकार कर दिया और कहा कि वह महिलाओं को कपड़े चुनने की स्वतंत्रता का समर्थन करती हैं। गिरफ्तारी के डर से उन्होंने ईरान न लौटकर यूनाइटेड किंगडम में शरण ली। उनके साहसिक रुख के लिए उन्हें 2021 में अंतरराष्ट्रीय महिला साहस पुरस्कार मिला।

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स्टेडियम बंद होने पर ब्लू गर्ल का विरोध प्रदर्शन 

सितंबर 2019 में एस्टेघलाल एफसी की समर्थक सहर खोदयारी (ब्लू गर्ल) (29) ने पुरुषों का वेश धारण करके Azadi Stadium में फुटबॉल मैच देखने की कोशिश की। 1981 से ईरान में महिलाओं के स्टेडियम में प्रवेश पर प्रतिबंध था। इस वजह से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और छह महीने तक की जेल की आशंका थी।

2 सितंबर, 2019 को तेहरान की अदालत से सजा सुनने के बाद खोदयारी ने विरोध में खुद को आग लगा ली। अधिकांश शरीर जलने की वजह से 9/10 सितंबर 2019 में उनका तेहरान में निधन हो गया। उनकी मौत ने व्यापक जनाक्रोश को जन्म दिया। इसके बाद मजबूर होकर ईरानी सरकार को चुनिंद स्टेडियमों में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दी।

मित्रा हेजाजीपुर – ईरानी ग्रैंडमास्टर ने अनिवार्य हिजाब को चुनौती दी

दिसंबर 2019 में ईरानी शतरंज ग्रैंडमास्टर मित्रा हेजाजीपुर ने मॉस्को विश्व रैपिड-ब्लिट्ज चैंपियनशिप 2019 में बिना हिजाब के खेलकर ईरान के अनिवार्य ड्रेस कोड का विरोध किया। इसके बाद 2020 में उन्हें राष्ट्रीय टीम से प्रतिबंधित कर दिया गया। वे ईरान नहीं लौेटीं और फ्रांस में बस गईं, फ्रांसीसी नागरिकता ली और अब फ्रांस के लिए खेलते हुए जबरन हिजाब का खुलकर विरोध करती हैं।

डोर्सा डेराखशानी – ईरानी शतरंज स्टार ने अनिवार्य हिजाब का उल्लंघन किया

ईरान की इंटरनेशनल शतरंज खिलाड़ी डोर्सा डेराखशानी को 2017 के जिब्राल्टर शतरंज टूर्नामेंट में बिना हिजाब खेले जाने पर ईरान की राष्ट्रीय टीम से प्रतिबंधित कर दिया गया। बाद में स्पेन में पढ़ाई के दौरान उन्होंने विदेश में बसने का फैसला किया और अमेरिका की ओर से खेलना शुरू किया, जो महिलाओं की स्वतंत्रता का प्रतीक बना।

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