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National Wildlife Week: जंगल में एक सेल्फी आपकी जान ले सकती है!!                

Editor Ritam HindiEditor Ritam Hindi06 Oct 2025, 10:17 am IST
National Wildlife Week: जंगल में एक सेल्फी आपकी जान ले सकती है!!                

इंस्टाग्राम और टिकटॉक के जमाने में किसी भी स्थिति में परफेक्ट सेल्फी लेना एक सांस्कृतिक नहीं, विकृत जुनून बन गया है। लेकिन जब सेल्फी का यह क्रेज राष्ट्रीय वन्यजीव उद्यानों तक जा पहुंचा है, तो ऐसे में यह इंसानों और वन्यजीवों, दोनों के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।

इस अक्टूबर में, जब हम ‘राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह’ मना रहे हैं, तो आइए, भारत के कर्नाटक राज्य और अन्य भागों में ‘वन्यजीव सेल्फी क्रेज’ के विभिन्न पहलुओं पर नजर डालें।

जंगली जानवरों के साथ सेल्फी लेना ज्यादातर लोगों के अंदाजे से भी कहीं ज्यादा खतरनाक है। ऐसी हरकतें अक्सर जानवरों को परेशान करती हैं, उनके स्वाभाविक व्यवहार को बिगाड़ती हैं, और इंसानों और जानवरों, दोनों के जीवन के लिए खतरनाक हो सकती हैं।

इसके प्रमाण के तौर पर पहले ही कई दुखद घटनाएं हो चुकी हैं। उदाहरण के लिए, जंगली हाथियों की पास से तसवीरें लेने के लिए प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसने वाले पर्यटकों को गंभीर चोटें आई हैं या कई मामलों में वे अपनी जान भी गंवा चुके हैं।

सेल्फी से उत्पन्न तनाव जंगली जानवरों के व्यवहार को अप्रत्याशित बना सकता है। कभी-कभी, वे डर, झुंझलाहट या रक्षात्मक प्रवृत्ति के कारण सेल्फी लेने का प्रयास करने वालों पर हमला कर देते हैं। इसके अलावा, जंगली जानवरों के पास जाने या उन्हें भोजन खिलाने से दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं, जैसे मनुष्यों पर निर्भरता, प्राकृतिक व्यवहार में व्यवधान, तथा अपने झुंड से अस्वीकृति।

भारत में वन्यजीव सेल्फी से संबंधित दुर्घटनाएं :

अगस्त 2025 में कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिजर्व में एक आदमी एक हाथी के साथ सेल्फी लेने की कोशिश कर रहा था। उसने फ्लैश वाले कैमरे का इस्तेमाल किया और इससे हाथी प्रभावित हुआ। नतीजतन, वन विभाग ने उस व्यक्ति को अस्थायी रूप से हिरासत में ले लिया और वन्यजीव संरक्षण नियमों का उल्लंघन करने के लिए उस पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया।

वहीं 2018 में ओडिशा के एक वन पार्क में सेल्फी लेने की कोशिश कर रहे एक व्यक्ति को एक भालू ने घायल कर दिया था, जिससे जंगली जानवरों के करीब आने के घातक परिणामों का पता चलता है। छत्तीसगढ़ से भी ऐसी ही घटनाएं सामने आई हैं जिसमें एक 21 वर्षीय युवक पर हाथी ने हमला कर दिया और उसकी मौत हो गई। वह भी अपने तीन दोस्तों के साथ सेल्फी लेने की कोशिश कर रहा था। वर्ष 2024 में महाराष्ट्र में एक आक्रामक हाथी ने शशिकांत सात्रे को कुचलकर मार डाला था।

मार्च 2024 में ओडिशा सरकार ने लोगों पर वन्यजीव प्रजातियों के साथ फोटो और सेल्फी लेने पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसमें उनके शव, शरीर के अंग और ट्रॉफियां शामिल हैं। यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत है। जिनमें ऐसा करना दंडनीय अपराध है। अधिनियम के अनुसार ऐसे अपराधों के लिए अधिकतम 7 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।

कर्नाटक के बांदीपुर और नागरहोल जैसे प्रसिद्ध अभयारण्यों में जहां हाथियों का घनत्व (6,000 से ज्यादा) अधिक है, सेल्फी से होने वाले खतरों को रोकने में सबसे आगे रहा है। वर्ष 2018 से कर्नाटक राज्य राष्ट्रीय उद्यानों और बाघ अभयारण्यों की स्थापना के लिए काम कर रहा है। इसलिए अभयारण्यों सहित सभी संरक्षित वनों को ‘सेल्फी-मुक्त क्षेत्र’ घोषित किया है।

राज्य वन विभाग ने समर्पित गश्ती दल तैनात किए हैं और जंगलों और अभयारण्यों के प्रवेश पॉइंट्स पर चेतावनी संकेत लगाए हैं। साथ ही उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी के माध्यम से वाहन पार्किंग की निगरानी की जा रही है। मई 2025 में चारमाडी घाट पर पर्यटक का हाथी के साथ सेल्फी का एक वीडियो वायरल होने के बाद, राज्य भर में चेतावनी जारी की गई और इसमें शामिल लोगों को गिरफ्तार करने का आग्रह किया गया।

सेल्फी से संबंधित मौतों में भारत दुनिया में सबसे आगे

कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय और इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के शोधकर्ताओं द्वारा 2016 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत में किसी भी अन्य देश की तुलना में सेल्फी से जुड़ी मौतें काफी ज्यादा दर्ज की गई हैं। द बार्बर लॉ फर्म के एक नए अध्ययन से पता चला है कि कौन से देश सेल्फी के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक हैं, और दुर्भाग्य से भारत में 271 से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। सेल्फी और उससे संबंधित घटनाएं सूची में भारत सबसे ऊपर था।

Photo Credit: Navbharattimes

हालांकि यह सब वन क्षेत्रों और वन्यजीवों से संबंधित नहीं हैं, लेकिन यह मानव और वन्यजीव दोनों के लिए एक बढ़ता हुआ खतरा है, जिसे अब भारत की केंद्र और राज्य सरकारों ने भी स्वीकार कर लिया है।

कर्नाटक का संदेश : वन्यजीवों का सम्मान करें

कर्नाटक की वन्यजीव सेल्फी प्रतिबंध नीति एक कड़ा संदेश देती है कि वन्यजीवों का सम्मान सुरक्षित दूरी से किया जाना जरूरी है। वाहनों से उतरना, खाना खिलाना और नजदीक से तसवीरें लेने का प्रयास करना दंडनीय अपराध है। अधिकारी अक्सर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में गश्त करते हैं और स्थानीय लोगों और पर्यटकों को खतरों और कानून के बारे में शिक्षित करते हैं। पर्यटकों को जागरूक करने के लिए जागरुकता अभियान चलाए जाते हैं।

कुल मिलाकर, यह याद रखना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर एक पल का उत्साह महंगा पड़ सकता है और कभी-कभी जानलेवा भी। कर्नाटक में वन्यजीवों की सेल्फी पर प्रतिबंध एक स्वागत योग्य और जरूरी कदम है। लेकिन इसे वास्तव में प्रभावी बनाने के लिए जागरुकता और व्यवहार परिवर्तन को साथ-साथ चलना होगा। पर्यटकों के लिए संदेश सरल है-दूर से वन्यजीवों को देखें, उनकी प्रशंसा करें, संरक्षित क्षेत्रों का सम्मान करें और एक सुरक्षित भविष्य के लिए तैयार रहें, और इन सबके लिए अपने सेल्फी के खतरनाक सपने को त्याग दें।

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