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राम रथ यात्रा: आस्था का अजेय ज्वार…जिसने एकजुट किया हिंदू समाज, आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद कैसा था देश का माहौल?

Editor Ritam HindiEditor Ritam Hindi25 Sept 2025, 10:03 am IST
राम रथ यात्रा: आस्था का अजेय ज्वार…जिसने एकजुट किया हिंदू समाज, आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद कैसा था देश का माहौल?

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म त्रेतायुग में हुआ था. लेकिन आज भी वह हम भारतीयों के बीच आस्था और आदर्श का केंद्र हैं. 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामजन्मभूमि पर बने भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई. यह दिन कोई सामान्य दिन नहीं था. यह 500 वर्षों की उस प्रतीक्षा के फलीभूत होने का क्षण था, जिसे देखने के लिए कई पीढ़ियां गुजर गईं. राम मंदिर आंदोलन को गति देने के लिए साल 1980 में विश्व हिंदू परिषद ने अपने प्रयास प्रारंभ किए. विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने आंदोलन को जन आंदोलन बनाने के लिए गहन प्रचार अधियान चलाया.

1980 में विहिप द्वारा प्रारंभ किए गए रामजन्मभूमि आंदोलन से देशभर में रामजन्म भूमि मुक्ति को लेकर व्यापक माहौल था. इसी बीच इस आंदोलन को गति देने के लिए साल 1990 में  उस समय के भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने राम रथ यात्रा प्रारंभ करने का निर्णय लिया. यह यह यात्रा 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से प्रारंभ होकर, कई राज्यों से होते हुए 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या पहुंचनी थी.

लाल कृष्ण आडवाणी ने 12 सितंबर 1990 को राम मंदिर निर्माण के सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा निकालने की घोषणा कर दी.  जिसके बाद तय तारीख  25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से यात्रा का शुभारंभ हुआ. रथ यात्रा सोमनाथ गुजरात से शुरू होकर गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार पहुंची थी. उस दौरान बिहार में मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव थे. लालू प्रसाद के आदेश पर लालकृष्ण आडवाणी को समस्तीपुर में 23 अक्टूबर 1990 को आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया.

यात्रा को मिला अपार जनसमर्थन

रामरथ यात्रा कई राज्यों से गुजरते हुए बिहार में प्रवेश कर चुकी थी. यात्रा को अपार जनसमर्थन मिल रहा था. आडवाणी जी का रथ जहां से गुजरता वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो जाती. लोकिन उस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने इसे अराजकता करार देते हुए यात्रा का संचालन कर रहे लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया. जिससे देशभर में आक्रोश फैल गया. लालू को स्वयं यह नहीं पता था कि राम मंदिर आंदोलन को लेकर इतना भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं.

रथ यात्रा का उद्देश्य

लालकृष्ण आडवाणी की इस यात्रा का उद्देश्य अयोध्या में मुस्लिम आक्रमणों के क्रूर ऐतिहासिक क्रम में दिखाना था. साथ ही मंदिर आंदोलन को गति देकर रामजन्मभूमि पर विशाल मंदिर बनाना था. राम रथ यात्रा को व्यापक जनसमर्थन मिला रहा था. रथ यात्रा प्रतिदिन करीब 300 किलोमीटर की दूरी करती थी. साथ ही आडवाणी की एक दिन में 6 सभाएं होती थीं. उनको सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ती थी.

जहां से रथ यात्रा गुजरती तो वहां महिलाएं और बच्चे छतों पर खड़े होकर देखने पहुंच जाते थे. यात्रा के चलते राममंदिर को लेकर देश भर में जबरदस्त माहौल बन गया. लोग नारे लगाते थे ‘सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे. लोगों की रथ के प्रति इतनी श्रद्धा हो गई थी कि जैसे मंदिर में पैसे चढ़ाए जाते हैं, वैसे ही लोग रथ पर पैसे चढ़ाते और शीश नवाते थे.

रथ यात्रा के दौरान लाल कृष्ण आडवाणी का भाषण

रथ यात्रा जहां रुकती वहां आडवाणी को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो जाते. उस दौरान जब आडवाणी को लालू प्रसाद यादव ने गिरफ्तार करवाया तब उनका प्रमुख भाषण था, ‘क्या अदालत इस बात का फैसला करेगी कि यहां पर राम का जन्म हुआ था या नहीं’.  आप से ( लालू प्रसाद) तो इतनी ही आशा है कि बीच में मत पड़ो. रास्ते में मत आओ. क्योंकि यह लोक रथ है. जनता का रथ है. जो सोमनाथ से चला है और जिसने मन में संकल्प किया है कि 30 अक्टूबर को वहां ( राम जन्मभूमि) पर पहुंच कर कारसेवा करेंगे और मंदिर वहीं बनाएंगे, उसको कौन रोकेंग?’

रथ यात्रा के बाद राजनीतिक विचारधारा पर क्या प्रभाव पड़ा?

राम रथ यात्रा के बाद भारत की राजनीति पूरी तरह से बदल चुकी थी. यात्रा से जहां लाल कृष्ण आडवाणी हिंदूवादी नेता बनकर उभरे, वहीं भाजपा को भी खूब लोकप्रियता मिली. भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के बाद, सबसे बड़ा राष्ट्रीय दल बनकर उभरी. 1989 में जहां भाजपा ने 85 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी, वहीं 1991 के आम चुनाव में यह संख्या बढ़कर 120 सीटों पर पहुंच गई. भाजपा के वोट प्रतिशत में भी जबदस्त इजाफा हुई. 1992 में विवादित ढाचा विध्वंस के बाद 1996 के आम चुनावों में बीजेपी को 161 सीटें मिलीं. भाजपा का जनसमर्थन लगातार बढ़ता रहा. बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 303 सीटें जीत पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया.

आंदोलन ने जनमत या सांस्कृतिक स्मृति को कैसे नया रूप दिया?

राम रथ यात्रा जहां राम मंदिर निर्माण के लिए थी, वहीं दूसरी ओर वीपी सिंह सरकार द्वारा मंडल कमीशन को स्वीकार करने के बाद बढ़ने वाली जातिवादी राजनीति की काट भी थी. इस यात्रा को हिंदू समाज का व्यापक जन समर्थन मिला. राम मंदिर आंदोलन और राम रथ यात्रा से हिंदू समाज में एकजुटता आई. जाति की राजनीति करने वालों को बड़ा झटका लगा. हिदुओं के वोटों के बल पर ही भाजपा ने 1991 के आम चुनाव में 120 सीटें जीतकर कांग्रेस को बड़ी चुनौती दी.

आडवाणी की गिरफ्तारी का परिणाम

आडवाणी की राम रथ यात्रा से देश में राम मंदिर को लेकर जोरदार माहौल बन गया. 23 अक्टूबर 1990 को बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी हुई. जिसके बाद 30 अक्टूबर व 2 नवंबर को बड़ी संख्या में कारसेवक अयोध्या पहुंचे और विवादित ढांचे के पास इकठ्ठा हो गए. जिस पर उस दौर के यूपी के सीएम मुलायम सिंह यादव ने फायरिंग के आदेश दे दिया. जिसमें कई कारसेवक मारे गए. उन्होंने अपने इस आदेश को कानून व्यवस्था बनाए रखने काो लेकर हलावा दिया.

रथ यात्रा को लेकर लोगों के संस्मरण क्या हैं?

भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह बताते हैं कि राम रथ यात्रा के दौरान जब आडवाणी जी को बिहार में गिरफ्तार कर लिया गया, तब  गोंडा, अयोध्या और लखनऊ का माहौल राममय हो गया. उसे याद कर आज भी जोश भर जाता है. चारों ओर ‘भारत माता की जय’ और ‘जयश्री राम’ के जयघोष हो रहा था.

बृजभूषण सिंह आगे बताते हैं कि आडवाणी जी बिहार से रिहा होकर दिल्ली चले गए. फिर 16 नवंबर 1990 को वह अयोध्या जाने के लिए रेलमार्ग से गोंडा आए. यहां से वह सड़क मार्ग से खुले वाहन में बैठकर अयोध्या पहुंचे. उन्हें देखकर लोगों ने खूब जय श्री राम का जयघोष किया.

25 सितंबर 1990 को लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ (गुजरात) से राम रथ यात्रा की शुरुआत की थी. उनका लक्ष्य था 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचकर रामलला के जन्मस्थान पर भव्य राम मंदिर के लिए कारसेवा करना. यह रथ यात्रा सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं थी, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक बन गई थी.

आगे  बृजभूषण सिंह बताते हैं कि  राम रथ यात्रा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार होते हुए आगे बढ़ी, लाखों लोग इसमें जुड़ते गए. गांव-गांव, गली-गली में “जय श्रीराम” के जयघोष गूंजने लगे. जगह-जगह लोगों ने दीप जलाकर, फूल बरसाकर और नारियल चढ़ाकर रथ का स्वागत किया. यह साफ हो गया था कि यह यात्रा अब सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन बन चुकी थी.

हालांकि, जब यात्रा बिहार पहुंची, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने 23 अक्टूबर को आडवाणी जी को गिरफ्तार करवा दिया. सरकारें यात्रा के बढ़ते प्रभाव से घबरा चुकी थीं. लेकिन गिरफ्तारी के बावजूद लोगों की आस्था नहीं रुकी. 30 अक्टूबर को हजारों रामभक्त अयोध्या पहुंचे.

उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उन्हें रोकने के लिए सख्त कदम उठाए. 30 अक्टूबर को कारसेवकों पर पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें कई श्रद्धालु बलिदान हो गए. इसके बाद भी लोग नहीं डरे.2 नवंबर को दोबारा भारी संख्या में रामभक्त अयोध्या पहुंचे. इस दिन भी पुलिस ने गोली चलाई, कई रामभक्तों ने प्राणों की आहुति दी.

इन घटनाओं से न सिर्फ अयोध्या, बल्कि पूरे देश में गुस्सा फैला. खासकर अवध क्षेत्र के जिलों में जनाक्रोश की लहर दौड़ गई. लोग सड़कों पर उतर आए, सरकारों के खिलाफ नारे लगाए. साथ ही राम मंदिर आंदोलन और तेज हो गया.

यात्रा के बारे में लालकृष्ण आडवाणी ने क्या लिखा?

मेरे भाषणों में जरा भी सांप्रदायिक कट्टरता नहीं थी. क्या मेरा अभियान मुस्लिम विरोधी था? बिल्कुल नहीं. हालांकि, रथ यात्रा को मिले जबरदस्त समर्थन से घबराकर, हमारे राजनीतिक विरोधियों ने मेरे खिलाफ इस दुष्प्रचार को और तेज कर दिया. उनका दुष्प्रचार निराधार और जानबूझकर किया गया था. मैंने उन्हें चुनौती दी कि वे मेरे भाषणों में एक भी ऐसी बात बताएं जो मुसलमानों या इस्लाम के खिलाफ हो. पूरी यात्रा के दौरान ऐसा एक भी शब्द नहीं था. इसके विपरीत, जब भी मैंने अपनी सभाओं में किसी को अनुचित नारा लगाते सुना, मैंने तुरंत अपनी असहमति व्यक्त की. -लालकृष्ण आडवाणी, माई कंट्री माई लाइफ (2008)

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