1 हजार से अधिक हिंदुओं का मतांतरण: सरगना कलीम समेत 16 कट्टरपंथियों को सजा, 12 को हुई थी उम्रकैद

आज के दी दिन 11 सितंबर 2024 को लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने अवैध धर्मांतरण की गतिविधियों में शामिल इस्लामिक रिसर्चर मौलाना कलीम सिद्दीकी सहित 16 लोगों को सजा सुनाई थी. जिसमें 12 लोगों को आजीवन कारावास व 4 लोगों को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी. साथ ही सभी पर अर्थदंड भी लगाया था. इस पूरे मामले की जांच यूपी एटीएस ने की थी.
एटीएन ने अपनी जांच में पाया था कि यह गिरोह प्रदेश के कई जिलों में सक्रिय है. गिरोह ने 1,000 हजार से अधिक हिंदुओं को भय दिखाकर या लालच देकर इस्लाम स्वीकार करवाया है. जिसमें से 450 लोगों के मतांतरण व निकाह के प्रमाण पत्र भी जांच एजेंसी ने बरामद किए थे. जांच में यह सामने आया था कि गिरोह के निशाने पर गरीब हिंदू थे. गिरोह को पाकिस्तान, बहरीन सहित कई मुस्लिम देशों से करोड़ों की फंडिंग प्राप्त की थी.
पीड़ित का विवरण
पुलिस के बयान के अनुसार, इस केस में कम से कम 1,000 हिंदुओं को शादी, पैसे और नौकरी का लालच देकर इस्लाम स्वीकार कराया गया. इनमें गरीब वर्ग और दिव्यांग (विशेष रूप से दृष्टि बाधित) जैसे लोग ज्यादा थे. आरोपी जामिया नगर इस्लामिक दावा सेंटर नाम का एक गिरोह चलाते थे. जिन्होंने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) से भी फंड प्राप्त किया था.
4 लाख का लालच देकर कराया मतांतरण
पीड़ितों में अमित प्रजापति का भी नाम सामने आया है. धर्मांतरण रैकेट का मुख्य आरोपी मौलाना कलीम सिद्दीकी ने उसे चार लाख रुपये और मनपसंद युवती से शादी कराने के का लालच दिया था. जिसके बाद मौलाना ने पीड़ित अमित प्रजापति का नाम बदलकर अब्दुल्ला रखा और उससे कलमा पढाया था. एटीएस ने ऐसे ही 450 लोगों के धर्म परिवर्तन के दस्तावेज़ और उनके निकाह के प्रमाण पत्र बरामद किया थे.
रैकेट का सरगना मौलाना कलीम सिद्दीकी और अन्य को सजा
मौलाना कलीम सिद्दीकी मतांतरण रैकेट का सरगना था. वह मेरठ का रहने वाला था. बीएससी और MBBS की पढ़ाई बीच में छोड़कर मतांतरण गिरोह चलना शुरू किया. वह इस्लामिक विद्वान, जमिया इमाम वलीउल्लाह ट्रस्ट एवं ग्लोबल पीस सेंटर का अध्यक्ष भी था. अवैध मर्तांतरण सिंडिकेट के जरिए उसने हजारों गरीब/दिव्यांग हिंदुओं का अवैध तरीके से मतांतरण कराया.
पुलिस ने उसे 21 सितंबर 2021 को गिरफ्तार किया था. 562 दिन जेल में रहने के बाद 5 मई 2023 को वह पैरोल पर रिहा हो गया था. जिसके बाद 11 सितंबर 2024 को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
वहीं, इस घटना में मौलाना कलीम सिद्दीकी का विशेष सहयोगी मौलाना उमर गौतम दिल्ली‑शाहीनबाग में इस्लामिक Da’wah Centre संचालित करता है. वह पहले हिंदू था. लेकिन बाद में वह इस्लाम स्वीकार कर देशव्यापी मतांतरण का रैकेट चलाता था. पुलिस ने उसे सितंबर 2021 में गिरफ्तार किया. कोर्ट ने उसे भी 11 सितंबर 2024 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
इन दोनों के अलावा कोर्ट ने इरफान शेख, सलाउद्दीन जैनुद्दीन शेख, प्रकाश रामेश्वर कावड़े उर्फ आदम, भुप्रिय बन्दो उर्फ अर्सलान मुस्तफा, कौशर आलम, फराज वाबुल्लाशाह, धीरज गोविंद राव जगताप, सरफराज अली जाफरी, काजी जहांगीर और अब्दुल्ला उमर को भी इस मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
सभी 17 आरोपी विभिन्न राज्यों से थे, जिनमें से 7 यूपी के (सिद्दीकी, गौतम और गौतम के पुत्र अब्दुल्ला उमर सहित), चार महाराष्ट्र से, तीन दिल्ली से व एक-एक गुजरात, हरियाणा और बिहार से थे. आरोपी अमेरिकी कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक अनवर अल-अवलाकी के साहित्य से प्रभावित पाए गए, जो इस्लामी आतंकवादी समूह अल-कायदा से जुड़ा था. आरोपियों का उद्देश्य भारत में मुस्लिमों की संख्या बढ़ाकर इसे इस्लामिक राष्ट्र बनाकर इस यहां शरिया कानून लागू करना था.
कब हुआ खुलासा?
इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट जून 2021 को लखनऊ एटीएस ने दर्ज की थी. एटीएस की जांच में सामने आया था कि जामिया नगर, मेरठ व अन्य जगहों पर अवैध मतांतरण का रैकेट सक्रिय है. जो लोगों को लालच और झांसा देकर इस्लाम स्वीकार करवा रहे हैं. जिसके बाद 21‑22 सितंबर 2021 की रात एटीएस ने कलीम सिद्दीकी, उमर गौतम सहित अन्य आरोपियों को दिल्ली‑देहरादून हाइवे के पास से गिरफ्तार किया था.
गिरफ्तारी के बाद जांच‑रिमांड के दौरान एटीएस ने आरोपियों की निशानदेही पर कई दस्तावेज (सिम, पासपोर्ट, सूची) आदि बरामद किए थे. साथ ही एटीएस ने गिरोह को हवाला व बैंक खातों के जरिए अरब देशों से (जैसे बहरीन से ₹1.5 करोड़ और अन्य खाड़ी देशों से ₹3 करोड़) फंडिंग मिलने की पुष्टि की थी.
3 साल सुनवाई के बाद आया फैसला
करीब 3 साल तक इस मामले की सुनवाई लखनऊ के एनआईए-एटीएस कोर्ट में हुई जिसके बाद कोर्ट ने कुल 17 आरोपियों में से 16 को दोषी ठहराया. एक आरोपी (इदरीस कुरैशी) को इलाहाबाद हाई कोर्ट से स्टे मिला. 11 सितंबर 2024 को कोर्ट में दोषियों की सजा का एलान किया. जिसमें 12 को उम्रकैद और 5 आरोपियों को 10-10 साल कारावास की सजा सुनाई.
किन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
आरोपियों के खिलाफ जिन धाराओं में मामला दर्ज किया गया था, उनमें IPC धारा 417, 120B, 153A, 153B, 295A, 121A, 123 व UP अवैध धर्मांतरण कानून की धारा‑3,4,5/8 के तहत आरोप लगाए गए. जिसके बाद लखनऊ में एनआईए की विशेष अदालत के जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने 10 सितंबर 2024 को 16 आरोपियों को दोषी करार दिया और 11 सितंबर 2024 को सजा का एलान किया था.
गवाहों के बयान
ATS ने कोर्ट में 24 गवाहों को पेश किया. जिसमें पीड़ित (मतांतरित लोग), आस-पास के लोग, दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले लोग शामिल थे. जिसके आधार पर कोर्ट ने सजा का एलान किया था.
गरीब हिंदू थे गिरोह के निशाने पर
इस्लामिक मतांतरण गिरोह के निशाने पर हिंदू समाज से आने वाले गरीब, महिला, दिव्यांग छात्र (खासकर सुनने में परेशानी वाले), दलित और आदिवासी थे. ATS ने अपनी जांच में कहा था कि इन पीड़ितों को लालच और भय दिखाकर इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित किया गया था. साथ ही उनका नाम इस्लाम के अनुसार रखा जाता है. उदाहरण के लिए अमित प्रजापति को अब्दुल्ला नाम दिया गया था साथ ही उसे 4 लाख रुपये नकद और मनपसंद लड़की से इस्लाम के अनुसार निकाह भी कराया गया था.
















